(N/A) मेंडल ने वंशागत कारकों के बारे में बताया था जो लक्षणप्रारूप (phenotype) को प्रभावित करते हैं। डार्विन ने शायद इन अवलोकनों की उपेक्षा की या इस पर मौन रहे। $20$ वीं सदी के पहले दशक में,ह्यूगो-डी-व्रीस ने इवनिंग प्रिमरोज़ (evening primrose) पौधे पर अपने काम के आधार पर उत्परिवर्तन (mutation) के विचार प्रस्तुत किए,जिसका अर्थ है जनसंख्या में अचानक आने वाला बड़ा अंतर।
उनका मानना था कि उत्परिवर्तन ही विकास का कारण है,न कि वे छोटी (वंशागत) विभिन्नताएँ जिनकी बात डार्विन करते थे। उत्परिवर्तन यादृच्छिक और दिशाहीन होते हैं,जबकि डार्विनियन विभिन्नताएँ छोटी और दिशात्मक होती हैं। डार्विन के लिए विकास एक क्रमिक प्रक्रिया थी,जबकि डी-व्रीस के अनुसार उत्परिवर्तन ही जाति-उद्भवन का कारण है,जिसे उन्होंने $Saltation$ (एक ही चरण में बड़ा उत्परिवर्तन) कहा।