(N/A) सूक्ष्मजीवों पर किए गए प्रयोग दर्शाते हैं कि पूर्व-अस्तित्व वाली लाभकारी उत्परिवर्तन (mutations),जब चयनित होते हैं,तो नए लक्षणप्रारूप (phenotypes) उत्पन्न करते हैं। कुछ पीढ़ियों के बाद,यह जाति-उद्भवन में परिणत होता है।
प्राकृतिक चयन वह प्रक्रिया है जिसमें वंशागत विभिन्नताएँ जीवन को बनाए रखने में सक्षम बनाती हैं,उच्च प्रजनन सफलता की ओर ले जाती हैं और बड़ी संख्या में संतानों के उत्पादन का परिणाम देती हैं। तार्किक विश्लेषण यह बताता है कि उत्परिवर्तन,जीन प्रवाह,आनुवंशिक विचलन (genetic drift),या युग्मकजनन के दौरान पुनर्संयोजन के कारण उत्पन्न विभिन्नताएँ भविष्य की पीढ़ियों में जीन और एलील की आवृत्ति में परिवर्तन लाती हैं।
प्राकृतिक चयन के माध्यम से,जीव अपनी प्रजनन सफलता को बढ़ाते हैं और एक नई आबादी के रूप में स्थापित होते हैं। प्राकृतिक चयन तीन प्रकार के विकासवादी परिवर्तनों की ओर ले जाता है:
$1$. स्थायीकारी चयन (Stabilizing selection): जहाँ कई व्यक्ति औसत लक्षण मान प्राप्त करते हैं।
$2$. दिशात्मक परिवर्तन (Directional change): जहाँ कई व्यक्ति औसत लक्षण मान के अलावा अन्य मान प्राप्त करते हैं।
$3$. विदारक विकास (Disruptive evolution): जहाँ वितरण वक्र के दोनों सिरों पर अधिक सदस्य परिधीय लक्षण मान प्राप्त करते हैं।