(N/A) प्राकृतिक चयनवाद और उपार्जित लक्षणों की वंशागति के बीच अंतर निम्नलिखित है:
$1$. प्राकृतिक चयनवाद (डार्विनवाद): यह सिद्धांत बताता है कि जिन जीवों में अनुकूल विभिन्नताएँ होती हैं,वे अपने पर्यावरण में बेहतर ढंग से अनुकूलित होते हैं और उनके जीवित रहने और प्रजनन करने की संभावना अधिक होती है। ये विभिन्नताएँ आनुवंशिक होती हैं और पीढ़ियों तक संचित होती रहती हैं।
$2$. उपार्जित लक्षणों की वंशागति (लैमार्कवाद): यह सिद्धांत बताता है कि अंगों के उपयोग या अनुपयोग के कारण किसी जीव द्वारा अपने जीवनकाल में अर्जित किए गए लक्षण अगली पीढ़ी में स्थानांतरित हो जाते हैं। यह परिकल्पना वैज्ञानिक रूप से गलत साबित हो चुकी है क्योंकि कायिक (somatic) परिवर्तन वंशागत नहीं होते हैं।