(N/A) $sp^2$ संकरण में,एक $s$ कक्षक और दो $p$ कक्षक आपस में मिश्रित होकर तीन समान $sp^2$ संकरित कक्षक बनाते हैं।
उदाहरण: $BCl_3$ अणु।
बोरॉन $(Z=5)$ का मूल अवस्था में इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[He] 2s^2 2p^1$ है। उत्तेजित अवस्था में,एक $2s$ इलेक्ट्रॉन $2p$ कक्षक में चला जाता है,जिससे $[He] 2s^1 2p_x^1 2p_y^1$ विन्यास प्राप्त होता है।
ये तीनों कक्षक $(2s, 2p_x, 2p_y)$ $sp^2$ संकरण द्वारा तीन $sp^2$ संकरित कक्षक बनाते हैं। ये कक्षक $120^{\circ}$ के कोण पर त्रिकोणीय समतलीय ज्यामिति में व्यवस्थित होते हैं।
ये तीनों $sp^2$ संकरित कक्षक क्लोरीन परमाणु के अर्ध-पूर्ण $3p$ कक्षक के साथ अतिव्यापन करके तीन $B-Cl$ $\sigma$ बंध बनाते हैं। इस प्रकार,$BCl_3$ की ज्यामिति त्रिकोणीय समतलीय होती है और $Cl-B-Cl$ बंध कोण $120^{\circ}$ होता है।