जल की स्थायी कठोरता को दूर करने की विधियों को समझाइए।

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(N/A) जल की स्थायी कठोरता जल में उपस्थित कैल्शियम और मैग्नीशियम के क्लोराइड और सल्फेट के घुलनशील लवणों के कारण होती है।
$(i)$ धावन सोडा (सोडियम कार्बोनेट) के साथ उपचार: धावन सोडा कठोर जल में उपस्थित घुलनशील कैल्शियम और मैग्नीशियम के सल्फेट और क्लोराइड के साथ अभिक्रिया करके अघुलनशील कार्बोनेट बनाता है।
$MCl_{2} + Na_{2}CO_{3} \longrightarrow MCO_{3} \downarrow + 2NaCl$ $(M = Mg, Ca)$
$MSO_{4} + Na_{2}CO_{3} \longrightarrow MCO_{3} \downarrow + Na_{2}SO_{4}$
$(ii)$ कैलगन विधि: सोडियम हेक्सामेटाफॉस्फेट $(Na_{6}P_{6}O_{18})$,जिसे व्यावसायिक रूप से 'कैलगन' कहा जाता है,को कठोर जल में मिलाया जाता है। अभिक्रियाएं इस प्रकार हैं:
$Na_{6}P_{6}O_{18} \longrightarrow 2Na^{+} + Na_{4}P_{6}O_{18}^{2-}$
$M^{2+} + Na_{4}P_{6}O_{18}^{2-} \longrightarrow [Na_{2}MP_{6}O_{18}]^{2-} + 2Na^{+}$ $(M = Mg, Ca)$
यह संकुल ऋणायन $Mg^{2+}$ और $Ca^{2+}$ आयनों को विलयन में बनाए रखता है।
$(iii)$ आयन-विनिमय विधि: इसे जिओलाइट/परम्यूटिट विधि भी कहा जाता है। जलयोजित सोडियम एल्युमिनियम सिलिकेट को जिओलाइट/परम्यूटिट कहा जाता है। इसे $NaZ$ के रूप में दर्शाया जाता है,जिसे कठोर जल में मिलाने पर विस्थापन अभिक्रिया होती है:
$2NaZ_{(s)} + M^{2+}_{(aq)} \longrightarrow MZ_{2(s)} + 2Na^{+}_{(aq)}$ $(M = Mg, Ca)$
जब जिओलाइट में सारा सोडियम उपयोग हो जाता है,तो यह अप्रभावी हो जाता है,लेकिन इसे जलीय सोडियम क्लोराइड विलयन द्वारा पुनर्जीवित किया जा सकता है:
$MZ_{2(s)} + 2NaCl_{(aq)} \longrightarrow 2NaZ_{(s)} + MCl_{2(aq)}$
$(iv)$ संश्लेषित रेजिन विधि: वर्तमान में कठोर जल को मृदु बनाने के लिए संश्लेषित धनायन विनिमयकों का उपयोग किया जाता है। यह विधि जिओलाइट विधि से अधिक प्रभावी है।
संश्लेषित रेजिन में $-SO_{3}H$ समूह वाला एक बड़ा कार्बनिक अणु होता है। रेजिन $(RSO_{3}H)$ को $NaCl$ के साथ उपचारित करके $(RNa)$ में बदल दिया जाता है। जब कठोर जल को इस रेजिन $(RNa)$ से गुजारा जाता है,तो $Ca^{2+}$ और $Mg^{2+}$ आयन $Na^{+}$ आयनों के साथ विनिमय हो जाते हैं:
$2RNa_{(s)} + M^{2+}_{(aq)} \longrightarrow R_{2}M_{(s)} + 2Na^{+}_{(aq)}$
इस रेजिन को जलीय सोडियम क्लोराइड विलयन की सहायता से पुनर्जीवित किया जा सकता है।

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