(N/A) $(i)$ हाइड्रोजन के साथ अभिक्रियाशीलता: समूह $16$ के तत्व $H_2E$ $(E = O, S, Se, Te, Po)$ प्रकार के हाइड्राइड बनाते हैं।
इनका अम्लीय गुण $H_2O$ से $H_2Te$ की ओर बढ़ता है। यह वृद्धि समूह में ऊपर से नीचे जाने पर $H-E$ बंध वियोजन एन्थैल्पी में कमी के कारण होती है।
समूह में ऊपर से नीचे जाने पर $H-E$ बंध वियोजन एन्थैल्पी में कमी के कारण हाइड्राइडों की तापीय स्थिरता $H_2O$ से $H_2Po$ की ओर घटती है।
जल को छोड़कर सभी हाइड्राइड अपचायक गुण प्रदर्शित करते हैं,जो $H_2S$ से $H_2Te$ की ओर बढ़ता है।
$(ii)$ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रियाशीलता: ये सभी तत्व $EO_2$ और $EO_3$ प्रकार के ऑक्साइड बनाते हैं $(E = S, Se, Te, Po)$.
ओजोन $(O_3)$ और सल्फर डाइऑक्साइड $(SO_2)$ गैसें हैं,जबकि सेलेनियम डाइऑक्साइड $(SeO_2)$ ठोस है। डाइऑक्साइड का अपचायक गुण $SO_2$ से $TeO_2$ की ओर घटता है; $SO_2$ अपचायक है,जबकि $TeO_2$ ऑक्सीकारक है। सल्फर,सेलेनियम और टेलुरियम $EO_3$ प्रकार के ऑक्साइड $(SO_3, SeO_3, TeO_3)$ भी बनाते हैं। दोनों प्रकार के ऑक्साइड अम्लीय होते हैं।
$(iii)$ हैलोजन के साथ अभिक्रियाशीलता: समूह $16$ के तत्व $EX_6, EX_4$ और $EX_2$ प्रकार के हैलाइड बनाते हैं।
हैलाइडों की स्थिरता का क्रम: $F^- > Cl^- > Br^- > I^-$.
हेक्साहैलाइडों में केवल हेक्साफ्लोराइड स्थिर हैं। सभी हेक्साफ्लोराइड गैसीय हैं और अष्टफलकीय ज्यामिति रखते हैं।
सल्फर हेक्साफ्लोराइड $(SF_6)$ त्रिविम बाधा (steric reasons) के कारण असाधारण रूप से स्थिर है।
टेट्राफ्लोराइडों में $SF_4$ गैस,$SeF_4$ द्रव और $TeF_4$ ठोस है। ये फ्लोराइड $sp^3d$ संकरण रखते हैं और त्रिकोणीय द्विपिरामिडीय (सी-सॉ) ज्यामिति दर्शाते हैं।
ऑक्सीजन को छोड़कर सभी तत्व डाइक्लोराइड और डाइब्रोमाइड बनाते हैं,जो $sp^3$ संकरण के कारण चतुष्फलकीय संरचना रखते हैं।
मोनोहैलाइड द्विलकी (dimeric) होते हैं,जैसे $S_2F_2, S_2Cl_2, S_2Br_2, Se_2Cl_2$ और $Se_2Br_2$। ये असमानुपातन (disproportionation) अभिक्रिया देते हैं: $2Se_2Cl_2 \rightarrow SeCl_4 + 3Se$.