$1^o$,$2^o$ और $3^o$ हैलाइडों की $S_N2$ अभिक्रिया के प्रति अभिक्रियाशीलता का क्रम समझाइए।

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(N/A) $S_N2$ अभिक्रिया के लिए अभिक्रियाशीलता का क्रम है: $CH_3X > 1^o$ हैलाइड $> 2^o$ हैलाइड $> 3^o$ हैलाइड।
$S_N2$ अभिक्रिया के दौरान,नाभिकरागी (nucleophile) उस कार्बन परमाणु पर आक्रमण करता है जिससे अवशिष्ट समूह (leaving group) जुड़ा होता है। इस कार्बन परमाणु पर मौजूद बड़े प्रतिस्थापी समूह त्रिविम बाधा (steric hindrance) उत्पन्न करते हैं। जैसे-जैसे इन समूहों का आकार बढ़ता है,$S_N2$ अभिक्रिया धीमी हो जाती है।
मिथाइल हैलाइड में $S_N2$ अभिक्रिया सबसे तेज़ होती है क्योंकि इसमें कार्बन से केवल तीन छोटे हाइड्रोजन परमाणु जुड़े होते हैं। तृतीयक $(3^o)$ एल्किल हैलाइड $S_N2$ अभिक्रिया में सबसे कम अभिक्रियाशील होते हैं क्योंकि उनमें मौजूद बड़े समूह आने वाले नाभिकरागी के लिए अधिकतम त्रिविम बाधा उत्पन्न करते हैं।

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