(N/A) $1874$ में डच वैज्ञानिक $J. van't\,Hoff$ और फ्रांसीसी वैज्ञानिक $C. LeBel$ ने स्वतंत्र रूप से प्रकाशिक सक्रियता और अणुओं की संरचना के बीच संबंध प्रस्तावित किया।
$(i)$ केंद्रीय कार्बन: एक यौगिक में,केंद्रीय कार्बन परमाणु के चारों ओर चार समूह (संयोजकताएं) चतुष्फलकीय रूप से व्यवस्थित होते हैं।
$(ii)$ असममित कार्बन: यदि किसी यौगिक में कार्बन परमाणु से जुड़े चारों प्रतिस्थापी अलग-अलग हों,तो ऐसे कार्बन को असममित कार्बन या स्टीरियोसेंटर कहा जाता है।
$(iii)$ असममिति और प्रकाशिक सक्रियता: असममित कार्बन (स्टीरियोसेंटर) वाले अणुओं में सममिति का अभाव होता है और वे असममित होते हैं। असममित अणु प्रकाशिक सक्रियता प्रदर्शित करते हैं।
$(iv)$ कायरल,कायरलिटी और प्रकाशिक सक्रियता: जो कार्बनिक अणु अपने दर्पण प्रतिबिंब पर अध्यारोपित नहीं हो सकते,उन्हें कायरल संरचनाएं कहा जाता है और इस गुण को कायरलिटी कहते हैं। कायरलिटी वाले अणुओं में असममित कार्बन होता है और वे प्रकाशिक सक्रिय होते हैं।
$(v)$ प्रतिबिंब रूप (एनैन्शियोमर्स): वे त्रिविम समावयवी जो एक-दूसरे के गैर-अध्यारोपित दर्पण प्रतिबिंब होते हैं,उन्हें एनैन्शियोमर्स कहा जाता है। वे कायरल होते हैं और उनमें कायरलिटी (असममिति) होती है।