(N/A) इथेनॉल का उत्पादन : इथेनॉल का उत्पादन निम्नलिखित है:
$(i)$ शर्करा का किण्वन (Fermentation) : यह सबसे पुरानी विधि है। शीरे (molasses),गन्ने या अंगूर जैसी शर्करा का एंजाइम इनवर्टेज की उपस्थिति में किण्वन करने पर ग्लूकोज और फ्रुक्टोज बनते हैं।
$C_{12}H_{22}O_{11} + H_{2}O \xrightarrow{\text{invertase}} C_{6}H_{12}O_{6} + C_{6}H_{12}O_{6}$
ग्लूकोज और फ्रुक्टोज दोनों का अणुसूत्र समान $C_{6}H_{12}O_{6}$ है लेकिन उनकी संरचनाएं भिन्न हैं। यीस्ट से एंजाइम जाइमेज प्राप्त होता है। जाइमेज द्वारा ग्लूकोज और फ्रुक्टोज का किण्वन करने से इथेनॉल बनता है।
$C_{6}H_{12}O_{6} \longrightarrow 2C_{2}H_{5}OH + 2CO_{2}$
$(ii)$ अंगूर से इथेनॉल : जब अंगूर पक जाते हैं,तो उनमें शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है और पके हुए अंगूरों की सतह पर यीस्ट उत्पन्न हो जाता है। जब अंगूर की शर्करा और यीस्ट में मौजूद जाइमेज एक-दूसरे के संपर्क में आते हैं,तो किण्वन प्रक्रिया शुरू हो जाती है। किण्वन अवायवीय परिस्थितियों (ऑक्सीजन की अनुपस्थिति) में होता है और इथेनॉल के साथ कार्बन-डाइऑक्साइड मुक्त होती है।
यदि उत्पन्न अल्कोहल की मात्रा $14\%$ से अधिक हो जाती है,तो जाइमेज की क्रिया बाधित हो जाती है। यदि किण्वन मिश्रण में हवा मिल जाए,तो हवा की ऑक्सीजन इथेनॉल को इथेनोइक एसिड में ऑक्सीकृत कर देती है,जिससे मादक पेय पदार्थों का स्वाद खराब हो जाता है।
$(b)$ भौतिक गुण : इथेनॉल एक रंगहीन द्रव है। इसका क्वथनांक $351\,K$ है।
$(c)$ उपयोग : यह पेंट उद्योग में विलायक के रूप में और कई कार्बनिक यौगिकों के संश्लेषण में उपयोगी है।
$(d)$ अल्कोहल का विकृतीकरण (Denaturation) : औद्योगिक अल्कोहल को पीने के लिए अनुपयुक्त बनाने के लिए इसमें थोड़ा कॉपर सल्फेट मिलाकर रंगीन बनाया जाता है और पिरिडीन मिलाकर दुर्गंधयुक्त बनाया जाता है। अल्कोहल के विकृतीकरण से यह पीने योग्य नहीं रहता।