(N/A) $HX$ के साथ ईथर की अभिक्रियाशीलता:
$(i)$ सभी क्रियात्मक समूहों में ईथर सबसे कम अभिक्रियाशील होते हैं।
$(ii)$ ईथर यौगिक कठोर परिस्थितियों में हाइड्रोजन हैलाइड $(HX)$ की अधिकता के साथ अभिक्रिया करके अल्कोहल और एल्किल हैलाइड उत्पन्न करते हैं।
$R-O-R + HX \xrightarrow{\Delta} RX + ROH$
$(iii)$ हाइड्रोजन हैलाइड $(HX)$ की ईथर के साथ अभिक्रियाशीलता का क्रम $HI > HBr > HCl$ होता है।
$(iv)$ ईथर उच्च तापमान पर सांद्र $HI$ या सांद्र $HBr$ के साथ अभिक्रिया करके $C-O$ बंध को तोड़ते हैं और अल्कोहल तथा एल्किल हैलाइड बनाते हैं।
$(b)$ ईथर में $C-O$ बंध विदलन की सुगमता:
$(i)$ समान एल्किल समूह वाले डाईएल्किल ईथर की $HX$ के साथ अभिक्रिया में $C-O$ बंध टूटने पर समान उत्पाद बनते हैं।
$(ii)$ एल्किल एरिल ईथर $(R-O-Ar)$ यौगिकों में,एल्किल-ऑक्सीजन $(R-O)$ बंध टूटता है और $RX$ तथा $ArOH$ बनते हैं।
$Ar-O$ बंध,$R-O$ बंध की तुलना में अधिक स्थिर और मजबूत होता है क्योंकि इसमें आंशिक द्वि-आबंध गुण होता है। दुर्बल $R-O$ बंध टूट जाता है और नाभिकरागी $X^-$ एल्किल समूह पर आक्रमण करके $RX$ बनाता है,जबकि $H^+$ फिनोक्साइड आयन से जुड़कर $ArOH$ (फिनोल) बनाता है।