(A) $AC$ परिपथ में अवशोषित कुल शक्ति का सूत्र $P = V_{rms} I_{rms} \cos \phi$ है,जहाँ $\phi$ वोल्टेज और धारा के बीच का कलांतर (phase difference) है।
$1$. प्रेरक परिपथ के लिए:
एक शुद्ध प्रेरक में,धारा वोल्टेज से $\phi = 90^{\circ}$ के कलांतर से पीछे रहती है।
शक्ति गुणांक (power factor) $\cos 90^{\circ} = 0$ है।
अतः,अवशोषित कुल शक्ति $P = V_{rms} I_{rms} \times 0 = 0 \; W$ है।
$2$. संधारित्र परिपथ के लिए:
एक शुद्ध संधारित्र में,धारा वोल्टेज से $\phi = 90^{\circ}$ के कलांतर से आगे रहती है।
शक्ति गुणांक $\cos 90^{\circ} = 0$ है।
अतः,अवशोषित कुल शक्ति $P = V_{rms} I_{rms} \times 0 = 0 \; W$ है।
दोनों स्थितियों में,एक पूर्ण चक्र में अवशोषित कुल शक्ति शून्य है क्योंकि शुद्ध प्रेरक और शुद्ध संधारित्र ऊर्जा का क्षय नहीं करते हैं; वे केवल इसे संग्रहीत और मुक्त करते हैं।