(N/A) ठोस $10^{-20}$ से $10^{7} \ \Omega^{-1} \ m^{-1}$ तक की विद्युत चालकता प्रदर्शित करते हैं। इन्हें तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
$(i)$ चालक (Conductors): जिन ठोसों की चालकता $10^{4}$ से $10^{7} \ \Omega^{-1} \ m^{-1}$ के बीच होती है। धातुओं की चालकता $10^{7} \ \Omega^{-1} \ m^{-1}$ के क्रम की होती है और इसलिए वे अच्छे चालक होते हैं।
$(ii)$ कुचालक (Insulators): ये वे ठोस हैं जिनकी चालकता बहुत कम,$10^{-20}$ से $10^{-10} \ \Omega^{-1} \ m^{-1}$ के बीच होती है। उदाहरण: लकड़ी,प्लास्टिक आदि।
$(iii)$ अर्धचालक (Semiconductors): ये वे ठोस हैं जिनकी चालकता $10^{-6}$ से $10^{4} \ \Omega^{-1} \ m^{-1}$ की मध्यवर्ती सीमा में होती है। अर्धचालक की चालकता मुख्य रूप से इसमें मौजूद दोषों या अशुद्धियों के कारण होती है। धातुओं और अर्धचालकों में विद्युत का चालन 'बैंड सिद्धांत' (Band Theory) द्वारा समझाया जाता है।
कुछ संक्रमण धातु ऑक्साइड विद्युत गुणों में भिन्नता दिखाते हैं:
| विद्युत गुण | संक्रमण धातु ऑक्साइड |
| धातु जैसे ऑक्साइड | $TiO, CrO_{2}, ReO_{3}, VO$ |
| निश्चित तापमान पर धातु से कुचालक व्यवहार | $Ti_{2}O_{3}, VO_{2}, V_{2}O_{3}$ |
| कुचालक जैसे ऑक्साइड | $MnO, CuO, FeO$ |
$ReO_{3}$ का स्वरूप और चालकता तांबे (copper) के समान होती है।