(N/A) लाल शैवाल,जो $Rhodophyceae$ वर्ग के अंतर्गत आते हैं,में जनन की तीन मुख्य विधियाँ पाई जाती हैं:
$1$. कायिक जनन: यह मुख्य रूप से सुकाय के खंडन (fragmentation) द्वारा होता है।
$2$. अलैंगिक जनन: यह अचल बीजाणुओं के निर्माण द्वारा होता है। चूंकि लाल शैवाल के जीवन चक्र की किसी भी अवस्था में कशाभिका (flagella) नहीं होती है,इसलिए वे मोनोस्पोर,न्यूट्रल स्पोर और टेट्रास्पोर जैसे अचल बीजाणु उत्पन्न करते हैं।
$3$. लैंगिक जनन: यह विषमयुग्मकी (oogamous) प्रकार का होता है। इसमें निषेचन के बाद जटिल विकास होता है। नर जनन अंग को स्पर्मेटेंजियम कहा जाता है,जो अचल नर युग्मक उत्पन्न करता है जिसे स्पर्मेशियम कहते हैं। मादा जनन अंग को कार्पोगोनियम कहा जाता है,जिसमें ट्राइकोगाइन नामक एक ग्राही गर्दन जैसी संरचना होती है।