(N/A) दी गई साम्यावस्था है: $Fe^{3+}(aq) + SCN^-(aq) \rightleftharpoons [Fe(SCN)]^{2+}(aq)$।
$(i)$ $H_2C_2O_4$ मिलाने पर: ऑक्जेलिक एसिड $C_2O_4^{2-}$ आयन प्रदान करता है जो $Fe^{3+}$ के साथ अभिक्रिया करके एक स्थिर संकुल $[Fe(C_2O_4)_3]^{3-}$ बनाता है। यह मुक्त $Fe^{3+}$ आयनों की सांद्रता को कम करता है। ला शातेलिए के सिद्धांत के अनुसार,साम्यावस्था बाईं ओर स्थानांतरित हो जाती है,जिससे गहरा लाल रंग हल्का हो जाता है।
$(ii)$ $HgCl_2$ मिलाने पर: $Hg^{2+}$ आयन $SCN^-$ के साथ अभिक्रिया करके एक बहुत स्थिर संकुल $[Hg(SCN)_4]^{2-}$ बनाते हैं। यह $SCN^-$ आयनों की सांद्रता को कम करता है। साम्यावस्था बाईं ओर स्थानांतरित हो जाती है और गहरा लाल रंग हल्का हो जाता है।
$(iii)$ $KSCN$ मिलाने पर: यह $SCN^-$ आयनों की सांद्रता को बढ़ाता है। ला शातेलिए के सिद्धांत के अनुसार,अतिरिक्त $SCN^-$ का उपभोग करने के लिए साम्यावस्था दाईं ओर स्थानांतरित हो जाती है,जिसके परिणामस्वरूप गहरे लाल रंग की तीव्रता बढ़ जाती है।