(N/A) एक जैविक समुदाय के सभी जंतु, पादप और सूक्ष्मजीव एक-दूसरे के साथ पारस्परिक क्रिया करते हैं।
- यह स्पष्ट है कि प्रकृति में, पादप, जंतु और सूक्ष्मजीव अकेले नहीं रह सकते हैं और न ही रहते हैं, बल्कि एक जैविक समुदाय बनाने के लिए विभिन्न तरीकों से पारस्परिक क्रिया करते हैं।
$\rightarrow$ अंतरजातीय पारस्परिक क्रियाएं दो अलग-अलग प्रजातियों की समष्टियों की पारस्परिक क्रिया से उत्पन्न होती हैं।
$\Rightarrow$ ये पारस्परिक क्रियाएं एक या दोनों प्रजातियों के लिए लाभकारी, हानिकारक या उदासीन हो सकती हैं।
विभिन्न परिणामों को नीचे दी गई तालिका में संक्षेपित किया गया है:
| प्रजाति $A$ | प्रजाति $B$ | पारस्परिक क्रिया का नाम |
| $+$ | $+$ | सहजीविता (Mutualism) |
| $-$ | $-$ | स्पर्धा (Competition) |
| $+$ | $-$ | परभक्षण (Predation) |
| $+$ | $-$ | परजीविता (Parasitism) |
| $+$ | $0$ | सहभोजिता (Commensalism) |
| $-$ | $0$ | असहभोजिता (Amensalism) |
$+$ चिह्न लाभकारी पारस्परिक क्रिया को दर्शाता है, $-$ चिह्न हानिकारक पारस्परिक क्रिया को दर्शाता है, और $0$ चिह्न उदासीन पारस्परिक क्रिया को दर्शाता है।
$\Rightarrow$ सहजीविता में दोनों प्रजातियों को लाभ होता है, और स्पर्धा में दोनों को हानि होती है।
परजीविता और परभक्षण दोनों में, केवल एक प्रजाति को लाभ होता है (क्रमशः परजीवी और परभक्षी), और यह पारस्परिक क्रिया दूसरी प्रजाति (क्रमशः परपोषी और शिकार) के लिए हानिकारक होती है।
वह पारस्परिक क्रिया जिसमें एक प्रजाति को लाभ होता है और दूसरी को न तो लाभ होता है और न ही हानि, उसे सहभोजिता कहते हैं। दूसरी ओर, असहभोजिता में एक प्रजाति को हानि होती है, जबकि दूसरी अप्रभावित रहती है।