(D) $(1)$ हार्मोन दो विधियों द्वारा विभिन्न शारीरिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। कुछ शारीरिक गतिविधियाँ उत्तेजक रसायनों के स्राव से होती हैं,जबकि कुछ अवरोधक रसायन गतिविधियों की दर,मात्रा और प्रकार को नियंत्रित करते हैं। इस प्रकार,वे उत्तेजक या अवरोधक क्रिया द्वारा विभिन्न शारीरिक गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं,इसलिए उन्हें नियामक रसायन कहा जाता है।
$(2)$ थायरोक्सिन हार्मोन की कमी के परिणामस्वरूप त्वचा खुरदरी और असामान्य हो जाती है,जीभ मोटी हो जाती है और श्वसन में खराबी आती है। यदि ऐसी कमी बचपन में देखी जाती है,तो यह बौनेपन (dwarfism) और मानसिक मंदता का कारण बनती है। वयस्कों में,यह चेहरे पर सूजन और शरीर के अंगों में सूजन जैसे लक्षण पैदा करता है। इस प्रकार,थायरोक्सिन का कम स्राव व्यक्ति के विकास को प्रभावित करता है।
$(3)$ इंसुलिन की कमी या कम स्राव रक्त में शर्करा के स्तर को बढ़ा देता है। अतिरिक्त शर्करा मूत्र के माध्यम से उत्सर्जित होती है। प्यास लगना,भूख बढ़ना और बार-बार पेशाब आना इसके मुख्य लक्षण हैं। हृदय,गुर्दे और आंखों पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है। ये डायबिटीज मेलिटस के लक्षण हैं।
$(4)$ अग्न्याशय में पाई जाने वाली अग्न्याशय की एसिनी (pancreatic acini) पाचक एंजाइमों से युक्त अग्न्याशय रस का स्राव करती है,जो नलिका के माध्यम से प्रवाहित होता है। इसलिए,नलिका की उपस्थिति के कारण यह एक बहिःस्रावी ग्रंथि के रूप में कार्य करती है। लैंगरहैंस के द्वीप (Islets of Langerhans) इंसुलिन और ग्लूकागन जैसे हार्मोन का स्राव करते हैं,जो सीधे रक्त में छोड़े जाते हैं। इसलिए,यह एक अंतःस्रावी ग्रंथि के रूप में भी कार्य करती है।