यदि एक प्रेरक (inductor) से प्रवाहित धारा $2 \ A$ से बढ़कर $3 \ A$ हो जाती है,तो प्रेरक में संचित चुंबकीय ऊर्जा में कितनी वृद्धि होगी ($\%$ में)?

  • A
    $125$
  • B
    $225$
  • C
    $50$
  • D
    $75$

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यदि $4$ $A$ की धारा $400$ फेरों वाली एक कुंडली से $3 \times 10^{-3}$ $Wb$ का चुंबकीय फ्लक्स उत्पन्न करती है, तो कुंडली में संचित ऊर्जा होगी: ($J$ में)

$2\,H$ प्रेरकत्व (inductance) वाली एक कुंडली से $2\,A$ की धारा $4\,A/s$ की दर से बढ़ रही है। प्रेरक में प्रति इकाई समय में संचित ऊर्जा ... $J/s$ है।

$5 \mu H$ प्रेरकत्व वाले एक प्रेरक में $2 \ A$ की धारा प्रवाहित होने पर संचित चुंबकीय ऊर्जा है

निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
$(a)$ प्रेरक (Inductor) चुंबकीय क्षेत्र के रूप में ऊर्जा संग्रहीत करता है।
$(b)$ संधारित्र (Capacitor) विद्युत क्षेत्र के रूप में ऊर्जा संग्रहीत करता है।
$(c)$ प्रेरक विद्युत और चुंबकीय दोनों क्षेत्रों के रूप में ऊर्जा संग्रहीत करता है।
$(d)$ संधारित्र विद्युत और चुंबकीय दोनों क्षेत्रों के रूप में ऊर्जा संग्रहीत करता है।

एक कुंडली का प्रेरकत्व $2 \, H$ और प्रतिरोध $4 \, \Omega$ है। कुंडली पर $10 \, V$ का विभवांतर लगाया जाता है। जब धारा अपने संतुलन मान तक पहुँच जाती है,तो चुंबकीय क्षेत्र में संचित ऊर्जा $.......... \times 10^{-2} \, J$ होगी।

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