(A) $1$. हैलोजन की ऑक्सीकरण शक्ति: $F_{2}$ सबसे प्रबल ऑक्सीकारक है क्योंकि इसका मानक अपचयन विभव सबसे अधिक होता है। यह अन्य हैलाइड आयनों $(Cl^{-}, Br^{-}, I^{-})$ को उनके संबंधित हैलोजन में ऑक्सीकृत कर सकता है।
$F_{2(aq)} + 2Cl^{-}_{(aq)} \rightarrow 2F^{-}_{(aq)} + Cl_{2(g)}$
$F_{2(aq)} + 2Br^{-}_{(aq)} \rightarrow 2F^{-}_{(aq)} + Br_{2(l)}$
$F_{2(aq)} + 2I^{-}_{(aq)} \rightarrow 2F^{-}_{(aq)} + I_{2(s)}$
चूंकि $Cl_{2}, Br_{2},$ और $I_{2}$,$F^{-}$ को $F_{2}$ में ऑक्सीकृत नहीं कर सकते,इसलिए ऑक्सीकरण शक्ति का क्रम $I_{2} < Br_{2} < Cl_{2} < F_{2}$ है।
$2$. हाइड्रोहेलिक अम्लों की अपचायक शक्ति: समूह में नीचे जाने पर बंध वियोजन एन्थैल्पी कम होने के कारण अपचायक शक्ति बढ़ती है $(HF < HCl < HBr < HI)$। $HI$ सबसे प्रबल अपचायक है।
$HI$ सांद्र $H_{2}SO_{4}$ को $SO_{2}$ में अपचयित कर सकता है:
$2HI + H_{2}SO_{4} \rightarrow I_{2} + SO_{2} + 2H_{2}O$
$HI$,$Cu^{2+}$ को $Cu^{+}$ में भी अपचयित कर सकता है:
$4I^{-} + 2Cu^{2+} \rightarrow Cu_{2}I_{2} + I_{2}$