निर्वात में दो समतल विद्युतचुंबकीय तरंगों के विद्युत क्षेत्र $\overrightarrow{E}_{1}=E_{0} \hat{j} \cos (\omega t-kx)$ और $\overrightarrow{E}_{2}=E_{0} \hat{k} \cos (\omega t-ky)$ द्वारा दिए गए हैं। $t=0$ पर,$q$ आवेश का एक कण मूल बिंदु पर $\overrightarrow{v}=0.8 c \hat{j}$ वेग के साथ है ($c$ निर्वात में प्रकाश की गति है)। कण द्वारा अनुभव किया गया तात्कालिक बल है:

  • A
    $E_{0} q(-0.8 \hat{i}+\hat{j}+\hat{k})$
  • B
    $E_{0} q(0.8 \hat{i}-\hat{j}+0.4 \hat{k})$
  • C
    $E_{0} q(0.8 \hat{i}+\hat{j}+0.2 \hat{k})$
  • D
    $E_{0} q(0.4 \hat{i}-3 \hat{j}+0.8 \hat{k})$

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विद्युतचुंबकीय तरंगें क्या हैं?

$3.0 \ MHz$ आवृत्ति वाली एक विद्युत चुम्बकीय तरंग निर्वात से $\epsilon = 16 \epsilon_0$ विद्युतशीलता वाले एक अचुंबकीय माध्यम में प्रवेश करती है,जहाँ $\epsilon_0$ निर्वात की विद्युतशीलता है। तरंगदैर्ध्य में परिवर्तन है

एक स्रोत $8.2 \times 10^6 \text{ Hz}$ आवृत्ति की विद्युत चुम्बकीय तरंगों का उत्सर्जन करता है। इन तरंगों की तरंगदैर्ध्य मीटर में क्या होगी?

निर्वात की विद्युतशीलता $(\epsilon_{0})$, निर्वात की चुंबकशीलता $(\mu_{0})$ और प्रकाश की गति $(c)$ के बीच संबंध बताइए।

कथन-$I$ :- विद्युतचुंबकीय तरंग के संचरण के दौरान,$\vec{E}$,$\vec{B}$ और संचरण की दिशा एक-दूसरे के लंबवत होते हैं।
कथन-$II$ :- विद्युतचुंबकीय तरंग के संचरण के दौरान,विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों के कारण ऊर्जा घनत्व समान होते हैं।

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