पानी में घुले एसिटिक एसिड $(CH_3COOH)$ का आणविक द्रव्यमान $60$ है,जबकि बेंजीन में घुलने पर यह $120$ हो जाता है। व्यवहार में इस अंतर का कारण क्या है?

  • A
    एसिटिक एसिड पानी में वियोजन और बेंजीन में संयोजन करता है।
  • B
    एसिटिक एसिड पानी में संयोजन और बेंजीन में वियोजन करता है।
  • C
    एसिटिक एसिड दोनों विलायकों में अप्रभावित रहता है।
  • D
    एसिटिक एसिड दोनों विलायकों में वियोजित होता है।

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एक तनु विलयन के हिमांक में प्रायोगिक अवनमन $0.025 \ K$ है। यदि वांट हॉफ गुणांक $(i)$ $2.0$ है, तो हिमांक में परिकलित अवनमन ($K$ में) है

बेंजोइक एसिड का आणविक भार बेंजीन में अधिक और पानी में कम होता है क्योंकि:

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बेंजीन में बने $0.2 \ m$ एसिटिक एसिड के विलयन के क्वथनांक और हिमांक के बीच का अंतर $75.7 \ ^\circ C$ है। वांट-हॉफ कारक $i$ का मान ज्ञात कीजिए। (बेंजीन के लिए $K_b = 2.65 \ K \ m^{-1}$,$K_f = 5.12 \ K \ m^{-1}$,$T_b^o = 80 \ ^\circ C$,$T_f^o = 5.5 \ ^\circ C$)

फिनोल एक विलायक में $60\%$ द्विलकीकृत (dimerised) होता है। फिनोल का प्रेक्षित (observed) आणविक भार क्या होगा?

$0.02 \ m$ विलयन के हिमांक में अवनमन $0.046 \ K$ है,तो इसके वियोजन की प्रतिशत मात्रा (percent dissociation) की गणना कीजिए। $\left[K_{f} \text{ जल के लिए } = 1.86 \ K \ kg \ mol^{-1} ; n=2\right]$ ($\%$ में)

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