पारिस्थितिक तंत्र के अध्ययन में पारिस्थितिक पिरामिड की कमियां क्या हैं?

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(N/A) पारिस्थितिक पिरामिड के अध्ययन में कई सीमाएँ हैं:
$1$. वे एक सरल खाद्य श्रृंखला की धारणा पर आधारित हैं,जो प्रकृति में शायद ही कभी मौजूद होती है। अधिकांश पारिस्थितिक तंत्रों में जटिल खाद्य जाल होते हैं।
$2$. वे इस तथ्य को ध्यान में नहीं रखते हैं कि एक ही प्रजाति एक साथ दो या दो से अधिक पोषण स्तरों से संबंधित हो सकती है।
$3$. उनमें मृतोपजीवी,अपघटक और परजीवियों के लिए कोई स्थान नहीं दिया गया है,भले ही वे पारिस्थितिक तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हों।
$4$. एक ही प्रजाति एक ही पारिस्थितिक तंत्र में एक साथ एक से अधिक पोषण स्तर पर कब्जा कर सकती है,जिसे मानक पिरामिड में नहीं दर्शाया जाता है।

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संख्या के पिरामिड और जैवभार (biomass) के पिरामिड पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

नीचे दो कथन दिए गए हैं।
कथन $I$ - खाद्य श्रृंखला जितनी छोटी होती है, प्रत्येक पोषण स्तर पर उतनी ही अधिक ऊर्जा उपलब्ध होती है।
कथन $II$ - ऊर्जा का पिरामिड कभी-कभी उल्टा भी हो सकता है।
उपरोक्त कथनों के आलोक में, नीचे दिए गए सही विकल्प का चयन करें:

$A$: पारिस्थितिक पिरामिड किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र के सभी महत्वपूर्ण कार्यों की व्याख्या नहीं कर सकते हैं।
$R$: पिरामिड वास्तव में एक से अधिक पोषण स्तरों पर कार्य करने वाले जीवों की भूमिका की व्याख्या नहीं करते हैं।

वैज्ञानिक कारण दीजिए: ऊर्जा के पिरामिड कभी भी उल्टे (inverted) नहीं होते हैं।

निम्नलिखित में से किस पारिस्थितिक तंत्र में जैवभार (biomass) का पिरामिड उल्टा देखा जा सकता है?

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