मेटा-निर्देशकारी समूह (meta-directing group) से क्या तात्पर्य है? इसके उदाहरण दीजिए और $-NO_2$ के मेटा-निर्देशकारी प्रभाव की व्याख्या कीजिए।

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(N/A) परिभाषा: बेंजीन वलय से जुड़ा वह समूह जो इलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन अभिक्रिया के दौरान आने वाले इलेक्ट्रोफाइल को मेटा-स्थिति पर निर्देशित करता है,मेटा-निर्देशकारी समूह कहलाता है।
$(b)$ उदाहरण: $-NO_2$,$-COOH$,$-SO_3H$,$-CHO$,$-COCH_3$,$-COCl$,$-COR$,$-COOR$ आदि मेटा-निर्देशकारी समूह हैं।
$(c)$ $-NO_2$ का मेटा-निर्देशकारी प्रभाव: $-NO_2$ समूह अपने $-I$ और $-M$ प्रभावों के कारण एक प्रबल इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूह है। यह बेंजीन वलय से,विशेष रूप से ऑर्थो और पैरा स्थितियों से इलेक्ट्रॉन घनत्व को खींचता है,जिससे इन स्थितियों पर आंशिक धनात्मक आवेश $(+\delta)$ उत्पन्न होता है। मेटा स्थिति ऑर्थो और पैरा स्थितियों की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक इलेक्ट्रॉन-समृद्ध रहती है। परिणामस्वरूप,आने वाला इलेक्ट्रोफाइल मेटा स्थिति पर जुड़ता है। अनुनाद संरचनाएं $(I-V)$ और संकर संरचना $(VI)$ ऑर्थो और पैरा स्थितियों पर इलेक्ट्रॉन की कमी को दर्शाती हैं।

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