(N/A) वह अभिक्रिया जिसमें दर न्यूक्लियोफाइल की सांद्रता से स्वतंत्र होती है और केवल सबस्ट्रेट की सांद्रता पर निर्भर करती है,उसे $S_{N}1$ अभिक्रिया कहा जाता है। इस प्रकार,$S_{N}1$ अभिक्रिया प्रथम कोटि की बलगतिकी का पालन करती है।
$(CH_{3})_{3}C-Br + OH^{-} \rightarrow (CH_{3})_{3}C-OH + Br^{-}$
दर $= k[(CH_{3})_{3}C-Br]$
क्रियाविधि:
चरण-$I$: ध्रुवीय $C-Br$ बंध धीरे-धीरे टूटकर एक कार्बोनियम आयन (कार्बोकेशन) और एक ब्रोमाइड आयन बनाता है। यह दर-निर्धारक चरण है।
$(CH_{3})_{3}C-Br \xrightarrow{\text{slow}} (CH_{3})_{3}C^{+} + Br^{-}$
चरण-$II$: इस प्रकार बने कार्बोनियम आयन पर न्यूक्लियोफाइल तेजी से आक्रमण करता है और प्रतिस्थापन अभिक्रिया को पूर्ण करता है।
$(CH_{3})_{3}C^{+} + OH^{-} \xrightarrow{\text{fast}} (CH_{3})_{3}C-OH$