(A) नर सहायक ग्रंथियों में युग्मित शुक्राशय (seminal vesicles),एक प्रोस्टेट ग्रंथि और युग्मित बल्बोयूरेथ्रल ग्रंथियां शामिल हैं। ये ग्रंथियां ऐसे तरल पदार्थों का स्राव करती हैं जो वीर्य (semen) का निर्माण करते हैं।
$1$. शुक्राशय: ये मूत्राशय के पीछे स्थित युग्मित ग्रंथियां हैं। ये वीर्य के आयतन का लगभग $60-70 \%$ उत्पादन करती हैं। इनका पीला,चिपचिपा स्राव फ्रुक्टोज,विटामिन $C$ और अन्य पदार्थों से भरपूर होता है जो शुक्राणु कोशिकाओं को पोषण प्रदान करते हैं। प्रत्येक शुक्राशय की नलिका शुक्रवाहिनी के साथ मिलकर स्खलन नलिका बनाती है।
$2$. प्रोस्टेट ग्रंथि: यह एक एकल ग्रंथि है जो मूत्राशय के आधार पर मूत्रमार्ग के चारों ओर स्थित होती है। इसका स्राव दूधिया होता है,जो शुक्राणुओं को सक्रिय करता है और उनकी गतिशीलता को बढ़ाता है। यह कई छोटी नलिकाओं के माध्यम से मूत्रमार्ग में प्रवेश करता है।
$3$. बल्बोयूरेथ्रल ग्रंथियां (काउपर की ग्रंथियां): ये प्रोस्टेट ग्रंथि के नीचे मूत्रमार्ग के दोनों ओर स्थित युग्मित ग्रंथियां हैं। ये एक क्षारीय (alkaline) तरल का स्राव करती हैं जो मूत्रमार्ग की अम्लता को बेअसर करता है और मैथुन के दौरान स्नेहक (lubricant) के रूप में कार्य करता है।
वीर्य का गठन: वीर्य शुक्राणुओं और सहायक ग्रंथियों के स्राव का दूधिया,चिपचिपा मिश्रण है। वीर्य की क्षारीय प्रकृति (pH $7.2$ से $7.6$) मादा प्रजनन पथ के अम्लीय वातावरण को बेअसर करने में मदद करती है। यह नाजुक शुक्राणुओं की रक्षा करता है और उनकी गतिशीलता को बढ़ाता है। एक सामान्य स्खलन में $2$ से $5 \text{ ml}$ वीर्य होता है।