(N/A) मेथॉक्सीएथेन की सांद्र $HI$ के साथ अभिक्रिया: जब मेथॉक्सीएथेन को सांद्र $HI$ के साथ गर्म किया जाता है,तो $C-O$ बंध टूटकर मेथिल आयोडाइड और एथेनॉल बनाता है। उच्च तापमान पर,एथेनॉल का आगे एथिल आयोडाइड में परिवर्तन हो जाता है।
$(b)$ क्रियाविधि: यह अभिक्रिया निम्नलिखित चरणों में $S_{N}2$ क्रियाविधि द्वारा संपन्न होती है:
चरण-$1$: अम्लीय $HI$ की उपस्थिति के कारण ईथर का प्रोटोनीकरण होता है,जिससे प्रोटोनीकृत ईथर बनता है।
चरण-$2$: $I^{-}$ द्वारा नाभिकरागी आक्रमण के परिणामस्वरूप मेथिल आयोडाइड $(CH_{3}I)$ और एथेनॉल $(C_{2}H_{5}OH)$ का निर्माण होता है।
$(i)$ नाभिकरागी $I^{-}$ प्रोटोनीकृत ईथर के छोटे एल्किल समूह $(CH_{3})$ पर विपरीत दिशा से आक्रमण करता है,जिससे एक संक्रमण अवस्था $(T)$ बनती है जहाँ $C-I$ बंध आंशिक रूप से बनता है और $C-O$ बंध आंशिक रूप से टूटता है।
$(ii)$ संक्रमण अवस्था में बंध टूट जाता है। चूंकि अभिक्रिया की दर दो प्रजातियों पर निर्भर करती है,इसलिए यह द्वितीय कोटि या द्वि-अणुक अभिक्रिया है।
$(iii)$ चूंकि नाभिकरागी $I^{-}$ ईथर से $OCH_{2}CH_{3}$ (एथॉक्सी) समूह को विस्थापित करता है,इसलिए यह अभिक्रिया नाभिकरागी प्रतिस्थापन क्रियाविधि का पालन करती है।