औद्योगिक रूप से,$H_2O_2$ को $2-alkylanthraquinols$ के स्वतः-ऑक्सीकरण द्वारा तैयार किया जाता है।
$2-ethylanthraquinol \underset{H_2/Pd}{\overset{O_2 \text{ (air)}}{\rightleftarrows}} H_2O_2 + \text{oxidised product}$
इस प्रक्रिया में $1\% H_2O_2$ बनता है। इसे पानी के साथ निकाला जाता है और कम दबाव पर आसवन द्वारा $\sim 30\%$ (द्रव्यमान द्वारा) तक सांद्रित किया जाता है।
इसे कम दबाव पर सावधानीपूर्वक आसवन द्वारा $\sim 85\%$ तक और अधिक सांद्रित किया जा सकता है। शुद्ध $H_2O_2$ प्राप्त करने के लिए शेष पानी को जमाकर अलग किया जा सकता है।
$(i)$ अम्लीय माध्यम में ऑक्सीकरण प्रभाव:
$2Fe^{2+}_{(aq)} + 2H^+_{(aq)} + H_2O_{2(aq)} \longrightarrow 2Fe^{3+}_{(aq)} + 2H_2O_{(l)}$
$PbS_{(s)} + 4H_2O_{2(aq)} \longrightarrow PbSO_{4(s)} + 4H_2O_{(l)}$
$(ii)$ अम्लीय माध्यम में अपचयन प्रभाव:
$2MnO_4^- + 6H^+ + 5H_2O_2 \longrightarrow 2Mn^{2+}_{(aq)} + 8H_2O + 5O_2$
$HOCl + H_2O_2 \longrightarrow H_3O^+ + Cl^- + O_2$
$(iii)$ क्षारीय माध्यम में ऑक्सीकरण प्रभाव:
$2Fe^{2+} + H_2O_2 \longrightarrow 2Fe^{3+} + 2OH^-$
$Mn^{2+} + H_2O_2 \longrightarrow Mn^{4+} + 2OH^-$
$(iv)$ क्षारीय माध्यम में अपचयन प्रभाव:
$I_2 + H_2O_2 + 2OH^- \longrightarrow 2I^- + 2H_2O + O_2$
$2MnO_4^- + 3H_2O_2 \longrightarrow 2MnO_2 + 3O_2 + 2H_2O + 2OH^-$