प्रकाश के किस सिद्धांत द्वारा प्रकाश-विद्युत प्रभाव (photoelectric effect) को समझाया जा सकता है?

  • A
    अनुप्रस्थ तरंगों के रूप में
  • B
    अनुदैर्ध्य तरंगों के रूप में
  • C
    ध्रुवीकृत हो सकने वाली तरंगों के रूप में
  • D
    क्वांटम सिद्धांत के रूप में

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एक प्रकाश-संवेदी सतह का कार्य फलन $\phi$ है। यदि $3 \phi$ ऊर्जा का एक फोटॉन इस सतह पर गिरता है, तो इलेक्ट्रॉन $4 \times 10^6 \,m/s$ के अधिकतम वेग के साथ बाहर आता है। जब फोटॉन की ऊर्जा को बढ़ाकर $7 \phi$ कर दिया जाता है, तो फोटोइलेक्ट्रॉन का अधिकतम वेग क्या होगा?

$\lambda$ तरंगदैर्ध्य का एकवर्णी प्रकाश $2.4 \text{ eV}$ कार्य फलन $(\phi)$ वाली धातु की सतह से फोटोइलेक्ट्रॉन उत्सर्जित करता है। इन फोटोइलेक्ट्रॉनों को मूल अवस्था (ground state) में हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ टकराया जाता है। $\lambda$ का वह अधिकतम मान ज्ञात कीजिए जिसके लिए हाइड्रोजन परमाणु का आयनीकरण हो सके [लीजिए, $hc = 1240 \text{ eV-nm}$]. ($\text{ nm}$ में)

जब $v$ आवृत्ति का प्रकाश किसी धातु पर आपतित होता है,तो फोटो-इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं। इसका कारण यह है कि...

$300 \ nm$ तरंगदैर्ध्य और $1.0 \ W/m^2$ तीव्रता वाला पराबैंगनी प्रकाश एक प्रकाश-संवेदी पदार्थ की सतह पर आपतित होता है। यदि आपतित फोटॉनों में से $1\%$ फोटॉन फोटो-इलेक्ट्रॉन उत्पन्न करते हैं,तो सतह के $1.0 \ cm^2$ क्षेत्रफल से उत्सर्जित फोटो-इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए।

जब आपतित विकिरण की ऊर्जा में $20\%$ की वृद्धि की जाती है,तो धातु की सतह से उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा $0.5\, eV$ से बढ़कर $0.8\, eV$ हो जाती है। धातु का कार्य फलन ............. $eV$ है।

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