प्रकाश-विद्युत प्रभाव में,यदि यह माना जाए कि फोटॉन की ऊर्जा उसकी आवृत्ति के समानुपाती है और धातु में इलेक्ट्रॉन द्वारा पूरी तरह से अवशोषित हो जाती है,तो प्रकाश-विद्युत धारा...

  • A
    आपतित फोटॉन की आवृत्ति बढ़ने पर घटती है।
  • B
    आपतित फोटॉन की आवृत्ति बढ़ने पर बढ़ती है।
  • C
    फोटॉन की आवृत्ति पर निर्भर नहीं करती है,बल्कि केवल आपतित प्रकाश की तीव्रता पर निर्भर करती है।
  • D
    आपतित प्रकाश की तीव्रता और आवृत्ति दोनों पर निर्भर करती है।

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दिखाइए कि तरंग सिद्धांत प्रकाश-विद्युत प्रभाव की मूलभूत विशेषताओं की व्याख्या नहीं कर सकता है।

$1 \ m$ की दूरी पर रखे एक छोटे लैंप द्वारा एक फोटोसेल प्रकाशित होता है। यदि लैंप को $2 \ m$ की दूरी पर स्थानांतरित कर दिया जाए,तो उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की संख्या होगी:

प्रकाश-विद्युत प्रभाव (photoelectric effect) में,धातु की सतह से इलेक्ट्रॉन केवल तब उत्सर्जित होते हैं जब आपतित प्रकाश में एक निश्चित न्यूनतम . . . . . . होती है।

एक छोटी धातु की गेंद को एक कुचालक धागे की सहायता से एक समान विद्युत क्षेत्र में लटकाया गया है। यदि एक उच्च ऊर्जा वाली $X-$किरण पुंज गेंद पर गिरती है,तो गेंद

सीज़ियम $(Cs)$, पोटैशियम $(K)$ और सोडियम $(Na)$ के कार्य फलन (work functions) क्रमशः $2.14 \ eV$, $2.30 \ eV$ और $2.75 \ eV$ हैं। यदि आपतित विद्युतचुंबकीय विकिरण की ऊर्जा $2.41 \ eV$ है, तो इनमें से कौन सी प्रकाश-संवेदी (photosensitive) सतहें फोटोइलेक्ट्रॉन उत्सर्जित कर सकती हैं?

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