$C$ धारिता वाले एक संधारित्र पर प्रारंभिक आवेश $Q_0$ है और इसे चित्रानुसार एक प्रेरक $L$ से जोड़ा गया है। $t = 0$ पर,स्विच $S$ को बंद किया जाता है। जब संधारित्र में संचित ऊर्जा,प्रेरक की ऊर्जा की तीन गुनी हो,तो प्रेरक से प्रवाहित होने वाली धारा क्या होगी?

  • A
    $\frac{Q_0}{2\sqrt{LC}}$
  • B
    $\frac{Q_0}{\sqrt{LC}}$
  • C
    $\frac{2Q_0}{\sqrt{LC}}$
  • D
    $\frac{4Q_0}{\sqrt{LC}}$

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यदि $t = 0$ पर संधारित्र (capacitor) में अधिकतम ऊर्जा संचित है,तो वह समय ज्ञात कीजिए जिसके बाद परिपथ में धारा अधिकतम होगी। दिया गया है $L = 25 \, mH$ और $C = 10 \, \mu F$।

$LC$ दोलन क्या हैं?

$LC$ परिपथ में होने वाले दोलनों की तुलना स्प्रिंग से जुड़े एक ब्लॉक के दोलनों से कीजिए।

$100 \ \mu F$ धारिता वाले एक संधारित्र को $12 \ V$ के विभव तक आवेशित किया जाता है और दोलनों को उत्पन्न करने के लिए इसे $6.4 \ mH$ के प्रेरक से जोड़ा जाता है। परिपथ में अधिकतम धारा होगी: ($A$ में)

एक $LC$ परिपथ की प्राकृतिक आवृत्ति $120 \ kHz$ है। जब परिपथ में संधारित्र को पूरी तरह से एक परावैद्युत पदार्थ से भर दिया जाता है,तो परिपथ की प्राकृतिक आवृत्ति $20 \ kHz$ कम हो जाती है। पदार्थ का परावैद्युतांक क्या है?

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