उपसहसंयोजन यौगिकों में संरचनात्मक समावयवता के विभिन्न प्रकारों को समझाइए।

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(N/A) $i$. आयनन समावयवता: यह समावयवता तब उत्पन्न होती है जब एक संकुल लवण में प्रति-आयन स्वयं एक संभावित लिगेंड होता है और एक ऐसे लिगेंड को विस्थापित कर सकता है जो बाद में प्रति-आयन बन सकता है। अतः,उपसहसंयोजन सत्ता और आयनन मंडल के बीच लिगेंडों का आदान-प्रदान होता है।
आयनन समावयवता प्रदर्शित करने वाले यौगिक जलीय विलयन में अलग-अलग आयन देते हैं।
उदाहरण के लिए: $[Co(NH_3)_5(SO_4)]Br$ और $[Co(NH_3)_5Br]SO_4$।
$ii$. जलयोजन समावयवता (विलायक समावयवता): यह समावयवता तब मौजूद होती है जहाँ पानी एक विलायक के रूप में शामिल होता है। जब पानी के अणु उपसहसंयोजन मंडल और आयनन मंडल के बीच आदान-प्रदान करते हैं,तो परिणामी समावयवियों को जलयोजन (विलायक) समावयवी कहा जाता है।
उदाहरण के लिए:
$[Cr(H_2O)_6]Cl_3 \Rightarrow \text{बैंगनी}$
$[Cr(H_2O)_5Cl]Cl_2 \cdot H_2O \Rightarrow \text{धूसर-हरा}$
$[Cr(H_2O)_4Cl_2]Cl \cdot 2H_2O \Rightarrow \text{हरा}$
$iii$. बंधन समावयवता: यह समावयवता उभयदंती लिगेंड युक्त उपसहसंयोजन यौगिक में उत्पन्न होती है। एक सरल उदाहरण थायोसाइनेट लिगेंड $(NCS^-)$ युक्त संकुल हैं जो सल्फर या नाइट्रोजन के माध्यम से जुड़ सकते हैं।
उदाहरण के लिए:
$1$. $[Cr(SCN)(H_2O)_5]^{2+}$ और $[Cr(NCS)(H_2O)_5]^{2+}$
$2$. $[Co(ONO)(NH_3)_5]^{2+}$ और $[Co(NO_2)(NH_3)_5]^{2+}$
जॉर्गेन्सेन ने $[Co(NH_3)_5(NO_2)]Cl_2$ संकुल में इस व्यवहार की खोज की,जो लाल रूप में प्राप्त होता है,जिसमें नाइट्राइट लिगेंड ऑक्सीजन $(-ONO)$ के माध्यम से बंधा होता है,और पीले रूप में,जिसमें नाइट्राइट लिगेंड नाइट्रोजन $(-NO_2)$ के माध्यम से बंधा होता है।
$iv$. उपसहसंयोजन समावयवता: इस प्रकार की समावयवता धनायनिक और ऋणायनिक सत्ताओं के बीच लिगेंडों के आदान-प्रदान से उत्पन्न होती है।

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निम्नलिखित में से कौन सा संकुल आयन ज्यामितीय समावयवता प्रदर्शित करता है?

निम्नलिखित में से कौन सा प्रकाशिक समावयवता प्रदर्शित करेगा?
$I$. $\text{Cis}-[Co(NH_3)_2(en)_2]^{3+}$
$II$. $\text{Trans}-[IrCl_2(C_2O_4)_2]^{3-}$
$III$. $[Rh(en)_3]^{3+}$
$IV$. $\text{Cis}-[Ir(H_2O)_3Cl_3]$

निम्नलिखित में से अनुचुंबकीय (paramagnetic) प्रजातियों की संख्या $............$ है।
$[Ni(CN)_4]^{2-}, [Ni(CO)_4], [NiCl_4]^{2-}$
$[Fe(CN)_6]^{4-}, [Cu(NH_3)_4]^{2+}$
$[Fe(CN)_6]^{3-}$ और $[Fe(H_2O)_6]^{2+}$

निम्नलिखित में से कौन से अणु/आयन समावयवता प्रदर्शित कर सकते हैं:
$A$. चतुष्फलकीय $NiCl_2Br_2^{2-}$$B$. वर्ग समतलीय $Pt(NH_3)_2Cl_2$
$C$. अष्टफलकीय $Co(NH_3)_3Cl_3$$D$. वर्ग समतलीय $Pd(NH_3)_3Br^{+}$
$E$. अष्टफलकीय $Co(en)_3^{3+}$

यहाँ,$en = 1,2-\text{diaminoethane}$.

नाइट्रोप्रुसाइड आयन में आयरन और $NO$,$Fe^{III}$ और $NO$ के बजाय $Fe^{II}$ और $NO^{+}$ के रूप में मौजूद होते हैं। इस बात की पुष्टि करने के लिए किस विधि का उपयोग किया जाता है?

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