(N/A) $SI$ प्रणाली में दो पूरक भौतिक राशियाँ हैं:
$(1)$ समतल कोण $d \theta$
$(2)$ घन कोण $d \Omega$
$(1)$ समतल कोण $d \theta$: वृत्त के चाप की लंबाई और उसकी त्रिज्या के अनुपात को समतल कोण $(d \theta)$ कहा जाता है।
चित्र से,समतल कोण $d \theta = \frac{\text{चाप}}{\text{त्रिज्या}} = \frac{ds}{r}$.
वृत्त की त्रिज्या के बराबर लंबाई वाले चाप द्वारा केंद्र पर अंतरित समतल कोण को $1$ रेडियन कहा जाता है। इसे $rad$ द्वारा दर्शाया जाता है। समतल कोण का अधिकतम मान $2 \pi \ rad$ होता है।
यदि $ds = r$ हो,तो $\theta = 1 \ rad$.
$[1^{\circ} = \frac{\pi}{180} \ rad]$ और $[1 \ rad = \frac{180}{\pi} \ \text{डिग्री}]$.
$(2)$ घन कोण $d \Omega$: गोले की सतह पर क्षेत्रफल $(\Delta A)$ द्वारा गोले के केंद्र पर अंतरित कोण को घन कोण $d \Omega$ कहा जाता है।
$d \Omega = \frac{dA}{r^2} \ \text{स्टेरेडियन}$.
चित्र से,घन कोण $d \Omega = \frac{\text{क्षेत्रफल}}{(\text{त्रिज्या})^2} = \frac{\Delta A}{r^2}$.
घन कोण का अधिकतम मान $4 \pi \ sr$ होता है।
$1 \ m$ त्रिज्या वाले गोले पर $1 \ m^2$ क्षेत्रफल द्वारा केंद्र पर अंतरित कोण को $1$ स्टेरेडियन कहा जाता है। इसका प्रतीक $sr$ है।
यदि $\Delta A = 1 \ m^2$ और $r = 1 \ m$ हो,तो $\Omega = 1 \ sr$.