(D) $1$. स्वतुल्यता: किसी भी रेखा $L_1 \in L$ के लिए,$L_1$ स्वयं के समांतर होती है। अतः,$(L_1, L_1) \in R$। इसलिए,$R$ स्वतुल्य है।
$2$. सममितता: मान लीजिए $(L_1, L_2) \in R$। इसका अर्थ है कि $L_1, L_2$ के समांतर है। चूंकि $L_1 \parallel L_2$ का अर्थ $L_2 \parallel L_1$ है,इसलिए $(L_2, L_1) \in R$। अतः,$R$ सममित है।
$3$. संक्रामकता: मान लीजिए $(L_1, L_2) \in R$ और $(L_2, L_3) \in R$। इसका अर्थ है कि $L_1 \parallel L_2$ और $L_2 \parallel L_3$। चूंकि $L_1 \parallel L_2$ और $L_2 \parallel L_3$ का अर्थ $L_1 \parallel L_3$ है,इसलिए $(L_1, L_3) \in R$। अतः,$R$ संक्रामक है।
चूंकि $R$ स्वतुल्य,सममित और संक्रामक है,इसलिए यह एक तुल्यता संबंध है।
$4$. रेखाओं का समुच्चय: $y = 2x + 4$ से संबंधित सभी रेखाओं का समुच्चय उन सभी रेखाओं से बना है जो इसके समांतर हैं। समांतर रेखाओं की ढाल समान होती है। $y = 2x + 4$ की ढाल $m = 2$ है। अतः,इसके समांतर कोई भी रेखा $y = 2x + c$ के रूप में होगी,जहाँ $c \in \mathbb{R}$।