आरेख दो अलग-अलग तापमानों $T_1$ और $T_2$ पर बल $F$ के अनुप्रयोग के कारण एक पतले समान तार की लंबाई में परिवर्तन $x$ को दर्शाता है। दिखाए गए परिवर्तन यह सुझाव देते हैं कि

  • A
    $T_1 > T_2$
  • B
    $T_1 < T_2$
  • C
    $T_1 = T_2$
  • D
    इनमें से कोई नहीं

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कथन $(A)$: तन्य (Ductile) धातुओं का उपयोग पतले तार बनाने के लिए किया जाता है।
कारण $(R)$: तन्य धातुओं के प्रतिबल-विकृति (stress-strain) वक्र में,प्रत्यास्थ सीमा और भंजन बिंदु को दर्शाने वाले बिंदुओं के बीच की लंबाई बहुत कम होती है।

दो अणुओं के बीच स्थितिज ऊर्जा $U$ और उनके बीच की दूरी $X$ के फलन को चित्र में दर्शाया गया है। ये दो अणु:

नीचे दिया गया ग्राफ एक धातु के लिए विशिष्ट प्रतिबल-विकृति (stress-strain) वक्र को दर्शाता है। ग्राफ पर उस बिंदु की पहचान करें जो सामग्री की अंतिम तन्य शक्ति (ultimate tensile strength) है।

दो तारों $A$ और $B$ का प्रतिबल-विकृति (stress-strain) ग्राफ चित्र में दिखाया गया है। यदि $Y_{A}$ और $Y_B$ क्रमशः तारों $A$ और $B$ के पदार्थों के यंग मापांक (Young's moduli) हैं, तो

धातु के लिए प्रतिबल $\to$ विकृति वक्र खींचिए और समझाइए।

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