जब एक $0.1 \, H$ की कुंडली में धारा $200 \, A/s$ की दर से बदल रही हो,तो उसमें उत्पन्न स्व-प्रेरित $e.m.f.$ ......$V$ है।

  • A
    $8 \times 10^{-4}$
  • B
    $8 \times 10^{-5}$
  • C
    $20$
  • D
    $125$

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मान लीजिए कि एक परिपथ में धारा $0.2 \,s$ में $6.0 \,A$ से घटकर $1.0 \,A$ हो जाती है। यदि परिपथ द्वारा $150 \,V$ का औसत emf प्रेरित होता है,तो परिपथ का स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) क्या है ($\,H$ में)?

एक एयर-कोर इंडक्टर (सोलेनोइड) का स्व-प्रेरकत्व $0.03 \ mH$ है। इंडक्टर में आयरन कोर डालने पर स्व-प्रेरकत्व बढ़कर $30 \ mH$ हो जाता है। उपयोग किए गए कोर की सापेक्ष पारगम्यता (relative permeability) है:

$l$ लंबाई और $A$ अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल वाले,$N$ निश्चित फेरों की संख्या वाले परिनालिका (solenoid) का स्व-प्रेरकत्व $L$ कब बढ़ता है?

$0.5 \, H$ स्व-प्रेरकत्व वाली एक कुंडली में,धारा $2 \, s$ में $0 \, A$ से $10 \, A$ तक एक समान दर से बदलती है। कुंडली में उत्पन्न $e.m.f.$ ... $V$ है।

एक समान रूप से लिपटी हुई प्रेरक कुंडली (inductor coil) का स्व-प्रेरकत्व $L$ और प्रतिरोध $R$ है। कुंडली को दो समान भागों में तोड़ा जाता है। फिर इन दो भागों को नगण्य आंतरिक प्रतिरोध वाली $E$ वोल्ट की बैटरी के साथ समानांतर क्रम में जोड़ा जाता है। स्थिर अवस्था (steady state) में बैटरी से प्रवाहित धारा है

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