एक प्रकाश-संवेदी धात्विक सतह का कार्य फलन $\phi$ है। यदि $3 \phi$ ऊर्जा का फोटॉन सतह पर गिरता है,तो इलेक्ट्रॉन $6 \times 10^6 \ m/s$ के अधिकतम वेग के साथ बाहर आता है। जब फोटॉन की ऊर्जा को बढ़ाकर $9 \phi$ कर दिया जाता है,तो फोटोइलेक्ट्रॉन का अधिकतम वेग क्या होगा?

  • A
    $12 \times 10^6 \ m/s$
  • B
    $6 \times 10^6 \ m/s$
  • C
    $3 \times 10^6 \ m/s$
  • D
    $24 \times 10^6 \ m/s$

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एक निश्चित धातु में प्रकाश-विद्युत प्रभाव उत्पन्न करने वाली विकिरण की अधिकतम तरंगदैर्ध्य $200 \ nm$ है। $100 \ nm$ तरंगदैर्ध्य के विकिरण के कारण इलेक्ट्रॉन द्वारा प्राप्त अधिकतम गतिज ऊर्जा .............. $eV$ होगी।

प्रकाश-विद्युत प्रभाव (photoelectric effect) में, निरोधी विभव (stopping potential) किस पर निर्भर करता है?

एक धातु का कार्य फलन (work function) $h \nu_0$ है। $\nu$ आवृत्ति का प्रकाश इस धातु पर गिरता है। प्रकाश-विद्युत प्रभाव (photoelectric effect) केवल तभी होगा यदि

दो धातुओं $A$ और $B$ के कार्य फलनों (work functions) का अनुपात $1:2$ है। यदि $A$ और $B$ की सतहों पर क्रमशः $f$ और $2f$ आवृत्ति का विकिरण आपतित होता है,तो उत्सर्जित फोटो-इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जाओं का अनुपात क्या होगा? (दिया गया है: $f > A$ की देहली आवृत्ति और $2f > B$ की देहली आवृत्ति)

एक निश्चित धातु के लिए देहली आवृत्ति $v_0$ है। जब $2v_0$ आवृत्ति का विकिरण इस धातु की सतह पर आपतित होता है,तो उत्सर्जित फोटो-इलेक्ट्रॉनों का अधिकतम वेग $2 \times 10^6 \ m/s$ होता है। यदि $3v_0$ आवृत्ति का विकिरण उसी धातु की सतह पर आपतित हो,तो उत्सर्जित फोटो-इलेक्ट्रॉनों का अधिकतम वेग . . . . . . है।

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