कथन : यदि किसी परिनालिका (solenoid) में धारा की दिशा को परिमाण समान रखते हुए उलट दिया जाए,तो परिनालिका में संचित चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है।
कारण : चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा घनत्व चुंबकीय क्षेत्र के समानुपाती होता है।

  • A
    यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण,कथन की सही व्याख्या है।
  • B
    यदि कथन और कारण दोनों सही हैं,लेकिन कारण,कथन की सही व्याख्या नहीं है।
  • C
    यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
  • D
    यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

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$(a)$ सोलेनोइड में संचित चुंबकीय ऊर्जा के लिए व्यंजक चुंबकीय क्षेत्र $B$,क्षेत्रफल $A$ और लंबाई $l$ के पदों में प्राप्त कीजिए।
$(b)$ इस चुंबकीय ऊर्जा की तुलना संधारित्र (capacitor) में संचित स्थिर-वैद्युत ऊर्जा से कैसे की जा सकती है?

$3 \ mH$ के स्व-प्रेरकत्व वाले सोलेनोइड से $2 \ A$ की धारा प्रवाहित होती है। सोलेनोइड के भीतर संचित ऊर्जा $.... \ mJ$ है।

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