यदि एक कुंडली (coil) में धारा को आधा कर दिया जाए,तो संचित ऊर्जा पिछले मान की कितनी गुनी हो जाएगी?

  • A
    $0.5$
  • B
    $0.25$
  • C
    $2$
  • D
    $4$

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$L = 200 \ mH$ के स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) वाली कुंडली (coil) में $4 \ A$ की धारा स्थापित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा . . . . . . है। ($J$ में)

निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
$(a)$ प्रेरक (Inductor) चुंबकीय क्षेत्र के रूप में ऊर्जा संग्रहीत करता है।
$(b)$ संधारित्र (Capacitor) विद्युत क्षेत्र के रूप में ऊर्जा संग्रहीत करता है।
$(c)$ प्रेरक विद्युत और चुंबकीय दोनों क्षेत्रों के रूप में ऊर्जा संग्रहीत करता है।
$(d)$ संधारित्र विद्युत और चुंबकीय दोनों क्षेत्रों के रूप में ऊर्जा संग्रहीत करता है।

$5 \ \Omega$ प्रतिरोध और $4 \ H$ प्रेरकत्व वाली एक कुंडली को $10 \ V$ की बैटरी से जोड़ा गया है। कुंडली में संचित ऊर्जा है: ($J$ में)

जब एक प्रेरक (inductor) में धारा $80 \ mA$ होती है,तो उसमें संचित चुंबकीय स्थितिज ऊर्जा $64 \times 10^{-3} \ J$ होती है। इस प्रेरक का प्रेरकत्व (inductance) कितना है ($H$ में)?

जब एक कुंडली (coil) से धारा $I$ प्रवाहित होती है,तो इसमें $E_1$ ऊर्जा संचित होती है। अब यदि धारा को घटाकर $I/2$ कर दिया जाए,तो कुंडली में संचित ऊर्जा $E_2$ हो जाती है। ऊर्जा में परिवर्तन क्या है?

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