प्रकाश-विद्युत प्रभाव (Photoelectric effect) को समझाइए।

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(N/A) प्रकाश-विद्युत प्रभाव: जब कुछ धातुएं (जैसे पोटेशियम,रूबिडियम,सीज़ियम आदि) प्रकाश की किरण के संपर्क में आती हैं,तो उनसे इलेक्ट्रॉन (या विद्युत धारा) उत्सर्जित होते हैं। इस घटना को प्रकाश-विद्युत प्रभाव कहा जाता है।
एक निश्चित आवृत्ति का प्रकाश निर्वात कक्ष के अंदर एक साफ धातु की सतह पर पड़ता है। धातु से इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं और उन्हें एक डिटेक्टर द्वारा गिना जाता है जो उनकी गतिज ऊर्जा को मापता है।
प्रायोगिक परिणाम और अवलोकन:
$(i)$ जैसे ही प्रकाश की किरण सतह पर पड़ती है,धातु की सतह से इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित हो जाते हैं। प्रकाश किरण के टकराने और इलेक्ट्रॉनों के उत्सर्जन के बीच कोई समय अंतराल नहीं होता है।
$(ii)$ उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रकाश की तीव्रता या चमक के समानुपाती होती है। (इलेक्ट्रॉनों की संख्या $\propto$ प्रकाश की तीव्रता)।
$(iii)$ देहली आवृत्ति (Threshold frequency): एक विशिष्ट न्यूनतम आवृत्ति,$v_{0}$ होती है,जिसके नीचे प्रकाश-विद्युत प्रभाव नहीं देखा जाता है। इसे देहली आवृत्ति कहा जाता है।
$v > v_{0}$ आवृत्ति पर,उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन एक निश्चित गतिज ऊर्जा के साथ बाहर आते हैं। इन इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा उपयोग किए गए प्रकाश की आवृत्ति बढ़ने के साथ बढ़ती है।
उपरोक्त सभी परिणामों को शास्त्रीय भौतिकी के नियमों के आधार पर नहीं समझाया जा सका,लेकिन आइंस्टीन $(1905)$ प्लांक के क्वांटम सिद्धांत का उपयोग करके प्रकाश-विद्युत प्रभाव को समझाने में सफल रहे।
$(\text{उपयोग किए गए प्रकाश की ऊर्जा}) \propto (\text{प्रकाश की आवृत्ति}) \propto (\text{उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा})$ और $(\text{उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की संख्या}) \propto (\text{प्रकाश की तीव्रता})$।

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