यदि किसी कुंडली (coil) से प्रवाहित होने वाली धारा को $50 \%$ कम कर दिया जाए,तो कुंडली में संचित ऊर्जा

  • A
    अपरिवर्तित रहेगी
  • B
    $25 \%$ कम हो जाएगी
  • C
    $75 \%$ कम हो जाएगी
  • D
    बढ़ जाएगी

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एक $100 mH$ की कुंडली में $1 A$ की धारा प्रवाहित हो रही है। चुंबकीय क्षेत्र के रूप में संचित ऊर्जा है ($J$ में)

$L = 200 \ mH$ के स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) वाली कुंडली (coil) में $4 \ A$ की धारा स्थापित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा . . . . . . है। ($J$ में)

यदि $I$ धारा $N$ फेरों वाली कुंडली से $\phi$ चुंबकीय फ्लक्स उत्पन्न करती है,तो कुंडली के चारों ओर के माध्यम में संचित चुंबकीय ऊर्जा है

$4 \, A$ की धारा वहन करने वाले $50 \, mH$ के प्रेरक (inductor) में संचित ऊर्जा $J$ में कितनी होगी?

कथन : यदि किसी परिनालिका (solenoid) में धारा की दिशा को परिमाण समान रखते हुए उलट दिया जाए,तो परिनालिका में संचित चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है।
कारण : चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा घनत्व चुंबकीय क्षेत्र के समानुपाती होता है।

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