यदि $I$ धारा $N$ फेरों वाली कुंडली से $\phi$ चुंबकीय फ्लक्स उत्पन्न करती है,तो कुंडली के चारों ओर के माध्यम में संचित चुंबकीय ऊर्जा है

  • A
    $\frac{N \phi I}{4}$
  • B
    $\frac{N \phi I}{2}$
  • C
    $\frac{NI}{2 \phi}$
  • D
    $\frac{N \phi}{2 I}$

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$L = 100 \, mH$ प्रेरकत्व वाले एक प्रेरक में $I = 10 \, A$ की धारा प्रवाहित हो रही है। प्रेरक में संचित ऊर्जा ....... $J$ है।

चुंबकीय क्षेत्र के संदर्भ में एक परिनालिका (solenoid) में संग्रहीत प्रति इकाई आयतन चुंबकीय ऊर्जा के लिए व्यंजक . . . . . . है।

जब एक कुंडली (coil) से धारा $I$ प्रवाहित होती है,तो इसमें $E_1$ ऊर्जा संचित होती है। अब यदि धारा को घटाकर $I/2$ कर दिया जाए,तो कुंडली में संचित ऊर्जा $E_2$ हो जाती है। ऊर्जा में परिवर्तन क्या है?

कथन : यदि किसी परिनालिका (solenoid) में धारा की दिशा को परिमाण समान रखते हुए उलट दिया जाए,तो परिनालिका में संचित चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है।
कारण : चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा घनत्व चुंबकीय क्षेत्र के समानुपाती होता है।

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