(N/A) एम्पीयर के परिपथीय नियम का उपयोग करते हुए: $\oint B \cdot dl = \mu_0 I_{\text{enclosed}}$.
$(a)$ $r > a$ के लिए: परिबद्ध धारा $I$ है। अतः,$B(2\pi r) = \mu_0 I$,जिससे $B = \frac{\mu_0 I}{2\pi r}$ प्राप्त होता है।
$(b)$ $r = a$ के लिए: चुंबकीय क्षेत्र $B = \frac{\mu_0 I}{2\pi a}$ है।
$(c)$ $r < a$ के लिए: धारा घनत्व $J = \frac{I}{\pi a^2}$ है। परिबद्ध धारा $I_{\text{enclosed}} = J(\pi r^2) = I \frac{r^2}{a^2}$ है। एम्पीयर के नियम को लागू करने पर: $B(2\pi r) = \mu_0 I \frac{r^2}{a^2}$,जिससे $B = \frac{\mu_0 I r}{2\pi a^2}$ प्राप्त होता है।
$(d)$ अक्ष पर $(r = 0)$: $r < a$ के व्यंजक में $r = 0$ रखने पर,हमें $B = 0$ प्राप्त होता है।