$L$ हेनरी के स्व-प्रेरकत्व वाले और $I$ एम्पियर की धारा प्रवाहित करने वाले एक प्रेरक (inductor) में संचित ऊर्जा है:

  • A
    $\frac{1}{2} L^{2} I$
  • B
    $\frac{1}{2} L I^{2}$
  • C
    $L I^{2}$
  • D
    $L^{2} I$

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जब एक प्रेरक (inductor) में धारा $60\, mA$ होती है,तो उसमें संचित चुंबकीय स्थितिज ऊर्जा $25\, mJ$ होती है। इस प्रेरक का प्रेरकत्व (inductance) ......$H$ है।

एक $100 mH$ की कुंडली में $1 A$ की धारा प्रवाहित हो रही है। चुंबकीय क्षेत्र के रूप में संचित ऊर्जा है ($J$ में)

कथन : यदि किसी परिनालिका (solenoid) में धारा की दिशा को परिमाण समान रखते हुए उलट दिया जाए,तो परिनालिका में संचित चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है।
कारण : चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा घनत्व चुंबकीय क्षेत्र के समानुपाती होता है।

एक प्रेरक (inductor) में ऊर्जा किस रूप में संचित होती है?

दो परिपथ $A$ और $B$ को समान $d.c.$ स्रोतों से जोड़ा गया है,जिनमें से प्रत्येक का $e.m.f.$ $10 \ V$ है। परिपथ $A$ और $B$ के स्व-प्रेरकत्व क्रमशः $L_A = 10 \ H$ और $L_B = 10 \ mH$ हैं। प्रत्येक परिपथ का कुल प्रतिरोध $40 \ \Omega$ है। धारा को स्थिर मान तक पहुँचाने के लिए परिपथ $A$ और परिपथ $B$ में खपत ऊर्जा का अनुपात क्या है?

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