(A) संपीड्यता गुणांक $(Z)$ को दाब और आयतन के गुणनफल तथा मोलों की संख्या,गैस स्थिरांक और तापमान के गुणनफल के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है: $Z = \frac{pV}{nRT}$।
$(i)$ एक आदर्श गैस के लिए,सभी तापमानों और दाबों पर $Z = 1$ होता है,क्योंकि यह $pV = nRT$ समीकरण का पालन करती है। $Z$ बनाम $p$ ग्राफ पर,इसे दाब अक्ष के समानांतर एक क्षैतिज रेखा द्वारा दर्शाया जाता है।
$(ii)$ $Z > 1$ (धनात्मक विचलन): यह उच्च दाब पर होता है जहाँ वास्तविक गैसें आदर्श गैसों की तुलना में कम संपीड्य होती हैं। $H_2$ और $He$ जैसी गैसें सभी दाबों पर $Z > 1$ दर्शाती हैं क्योंकि अणुओं द्वारा घेरे गए आयतन की तुलना में अंतर-आणविक बल नगण्य होते हैं।
$(iii)$ $Z < 1$ (ऋणात्मक विचलन): यह मध्यवर्ती दाब पर होता है जहाँ आकर्षण बल प्रभावी होते हैं,जिससे गैस आदर्श गैस की तुलना में अधिक संपीड्य हो जाती है। $CH_4$ और $CO_2$ जैसी गैसें कम दाब पर यह व्यवहार दर्शाती हैं।
$(iv)$ विचलन ग्राफ में $y$-अक्ष पर $Z$ और $x$-अक्ष पर $p$ को आलेखित किया जाता है। आदर्श गैस रेखा $Z = 1$ पर एक क्षैतिज रेखा होती है। वास्तविक गैसें दाब और तापमान के आधार पर इस रेखा से विचलित होने वाले वक्र दर्शाती हैं।
$(v)$ मोलर आयतन और $Z$ के बीच संबंध $Z = \frac{V_{real}}{V_{ideal}}$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $V_{real}$ वास्तविक मोलर आयतन है और $V_{ideal} = \frac{RT}{p}$ समान तापमान और दाब पर एक आदर्श गैस का मोलर आयतन है।