MHT CET 2026 Chemistry Question Paper with Answer and Solution in Hindi

806 QuestionsHindiWith Solutions

ChemistryQ201–287 of 806 questions

Page 5 of 12 · Hindi

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हकल के नियम के अनुसार, एक चक्रीय $\pi$-आणविक कक्षक निकाय को एरोमैटिक होने के लिए निम्नलिखित में से क्या धारण करना चाहिए?
A
$(4n + 2)$ $\pi$ इलेक्ट्रॉन।
B
$(2n + 2)$ $\pi$ इलेक्ट्रॉन।
C
$(4n - 2)$ $\pi$ इलेक्ट्रॉन।
D
$(2n - 2)$ $\pi$ इलेक्ट्रॉन।

Solution

(A) $1$. हकल का नियम बताता है कि एक समतलीय, चक्रीय, संयुग्मित निकाय के एरोमैटिक होने के लिए, इसमें $(4n + 2)$ $\pi$ इलेक्ट्रॉन होने चाहिए, जहाँ $n$ एक पूर्णांक है $(n = 0, 1, 2, ...)$।
$2$. यह नियम इस आवश्यकता से उत्पन्न होता है कि चक्रीय निकाय में सभी आबंधी आणविक कक्षक पूरी तरह से भरे हुए हों।
$3$. इसलिए, $\pi$ इलेक्ट्रॉनों की सही संख्या $(4n + 2)$ है।
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निम्नलिखित में से कौन से कथन सत्य हैं?
$(I)$ प्रेरणिक प्रभाव (Inductive effect) $\sigma$ बंध के माध्यम से कार्य करता है
$(II)$ अनुनाद प्रभाव (Resonance effect) $\pi$ बंध के माध्यम से कार्य करता है
$(III)$ प्रेरणिक प्रभाव $\pi$ बंध के माध्यम से कार्य करता है
$(IV)$ अनुनाद प्रभाव $\sigma$ बंध के माध्यम से कार्य करता है
A
$(I)$ और $(II)$
B
$(II)$ और $(III)$
C
$(III)$ और $(IV)$
D
$(I)$ और $(IV)$

Solution

(A) चरण $1$: प्रेरणिक प्रभाव विद्युत ऋणात्मकता में अंतर के कारण कार्बन परमाणुओं की श्रृंखला के साथ साझा इलेक्ट्रॉन युग्मों का स्थायी विस्थापन है, जो विशेष रूप से $\sigma$ बंधों के माध्यम से होता है।
चरण $2$: अनुनाद प्रभाव में संयुग्मित प्रणाली के माध्यम से $\pi$ इलेक्ट्रॉनों या एकाकी युग्मों (lone pairs) का विस्थानीकरण शामिल है, जो $\pi$ बंधों के माध्यम से होता है।
चरण $3$: इन परिभाषाओं की तुलना दिए गए कथनों से करने पर, $(I)$ और $(II)$ सही हैं।
चरण $4$: अतः, सही विकल्प $(A)$ है।
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सूची $I$ को सूची $II$ के साथ सुमेलित कीजिए:
$(A)$. प्रेरणिक प्रभाव (Inductive effect)$(I)$. $\pi$ इलेक्ट्रॉनों का विस्थानीकरण
$(B)$. अतिसंयुग्मन (Hyper-conjugation)$(II)$. $\pi$ इलेक्ट्रॉनों का विस्थापन
$(C)$. अनुनाद प्रभाव (Resonance effect)$(III)$. $\sigma$ इलेक्ट्रॉनों का विस्थानीकरण
$(IV)$. $\sigma$ इलेक्ट्रॉनों का विस्थापन
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
A
$(A) - (IV), (B) - (III), (C) - (I)$
B
$(A) - (II), (B) - (IV), (C) - (I)$
C
$(A) - (I), (B) - (II), (C) - (IV)$
D
$(A) - (III), (B) - (IV), (C) - (I)$

Solution

(A) चरण $1$: प्रेरणिक प्रभाव परमाणुओं या समूहों की विद्युत ऋणात्मकता में अंतर के कारण कार्बन श्रृंखला के साथ $\sigma$ इलेक्ट्रॉनों का स्थायी विस्थापन है। अतः, $(A) - (IV)$।
चरण $2$: अतिसंयुग्मन में असंतृप्त प्रणाली से सीधे जुड़े एल्किल समूह के $C-H$ बंध के $\sigma$ इलेक्ट्रॉनों का विस्थानीकरण शामिल है। अतः, $(B) - (III)$।
चरण $3$: अनुनाद प्रभाव में संयुग्मित प्रणाली में $\pi$ इलेक्ट्रॉनों या एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म का विस्थानीकरण शामिल है। अतः, $(C) - (I)$।
चरण $4$: इन्हें मिलाने पर, हमें $(A) - (IV), (B) - (III), (C) - (I)$ प्राप्त होता है। इसलिए, सही विकल्प $A$ है।
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आइसोप्रोपिल कार्बोनियम आयन में अतिसंयुग्मन (hyperconjugation) संरचनाओं की संख्या ज्ञात कीजिए।
A
$3$
B
$6$
C
$9$
D
$12$

Solution

(B) आइसोप्रोपिल कार्बोनियम आयन $(CH_3)_2CH^+$ होता है।
इस कार्बोनियम आयन में, धनावेशित कार्बन परमाणु दो मिथाइल समूहों से जुड़ा होता है।
प्रत्येक मिथाइल समूह में $3$ अल्फा-हाइड्रोजन होते हैं।
अल्फा-हाइड्रोजन की कुल संख्या = $3 + 3 = 6$ है।
अतिसंयुग्मन संरचनाओं की संख्या अल्फा-हाइड्रोजन की संख्या के बराबर होती है।
अतः, अतिसंयुग्मन संरचनाओं की संख्या $6$ है।
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निम्नलिखित में से कौन सा सबसे अधिक स्थिर कार्बोनियम आयन (carbocation) है?
A
$CH_3^+$
B
$(CH_3)_2CH^+$
C
$CH_3-CH_2^+$
D
$(CH_3)_3C^+$

Solution

(D) $1$. कार्बोनियम आयन की स्थिरता का निर्धारण प्रेरणिक प्रभाव (inductive effect) और अतिसंयुग्मन (hyperconjugation) द्वारा किया जाता है।
$2$. तृतीयक (tertiary) कार्बोनियम आयन $(CH_3)_3C^+$, द्वितीयक $(CH_3)_2CH^+$, प्राथमिक $CH_3-CH_2^+$ और मिथाइल $CH_3^+$ कार्बोनियम आयनों की तुलना में अधिक स्थिर होते हैं।
$3$. इसका कारण $(CH_3)_3C^+$ में नौ $\alpha$-हाइड्रोजन परमाणुओं की उपस्थिति है, जो अधिकतम अतिसंयुग्मन स्थिरीकरण प्रदान करते हैं।
$4$. अतः, $(CH_3)_3C^+$ सबसे अधिक स्थिर कार्बोनियम आयन है।
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ऑक्सीडेटिव रैंसिडिटी (विकृतगंधिता) किस प्रकार की अभिक्रिया है?
A
योगात्मक (addition)
B
प्रतिस्थापन (substitution)
C
मुक्त मूलक श्रृंखला अभिक्रिया (free radical chain reaction)
D
विस्थापन (displacement)

Solution

(C) चरण $1$: ऑक्सीडेटिव रैंसिडिटी तब होती है जब वसा और तेल ऑक्सीजन के संपर्क में आते हैं।
चरण $2$: इस प्रक्रिया में असंतृप्त वसा अम्लों का स्वतः-ऑक्सीकरण (autoxidation) शामिल होता है।
चरण $3$: स्वतः-ऑक्सीकरण की क्रियाविधि मुक्त मूलकों (free radicals) के निर्माण के माध्यम से आगे बढ़ती है, जो बाद में श्रृंखला के चरणों में फैलते हैं, इसलिए यह एक मुक्त मूलक श्रृंखला अभिक्रिया है।
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निम्नलिखित में से किस यौगिक की संरचना में द्वि-आबंध $(double \ bond)$ नहीं होता है?
A
टेट्राहाइड्रोफ्यूरान $(Tetrahydrofuran)$
B
4H-पाइरान $(4H-Pyran)$
C
पाइरोल $(Pyrrole)$
D
थायोफीन $(Thiophene)$

Solution

(A) चरण $1$: दिए गए यौगिकों की संरचनाओं का विश्लेषण करें।
चरण $2$: $Tetrahydrofuran$ $(C_4H_8O)$ एक संतृप्त चक्रीय ईथर है जिसमें कोई द्वि-आबंध नहीं होता है।
चरण $3$: $4H-Pyran$ $(C_5H_6O)$ की वलय में दो द्वि-आबंध होते हैं।
चरण $4$: $Pyrrole$ $(C_4H_5N)$ एक सुगंधित विषमचक्रीय यौगिक है जिसमें दो द्वि-आबंध होते हैं।
चरण $5$: $Thiophene$ $(C_4H_4S)$ एक सुगंधित विषमचक्रीय यौगिक है जिसमें दो द्वि-आबंध होते हैं।
चरण $6$: अतः, $Tetrahydrofuran$ ही एकमात्र सूचीबद्ध यौगिक है जिसमें द्वि-आबंध नहीं होता है।
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एक समजातीय श्रेणी (homologous series) के दूसरे और चौथे सदस्यों के मोलर द्रव्यमान में क्या अंतर है?
A
$12$
B
$24$
C
$28$
D
$36$

Solution

(C) एक समजातीय श्रेणी में, प्रत्येक क्रमिक सदस्य एक $-CH_2-$ समूह से भिन्न होता है।
$-CH_2-$ समूह का मोलर द्रव्यमान $12 + (2 \times 1) = 14 \text{ g/mol}$ होता है।
दूसरे और चौथे सदस्य के बीच का अंतर दो $-CH_2-$ समूहों के बराबर होता है।
अंतर $= 2 \times 14 \text{ g/mol} = 28 \text{ g/mol}$।
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उस अणु का सही $IUPAC$ नाम क्या है जिसमें बेंजीन वलय के चारों ओर विपरीत $(para)$ स्थितियों में दो अमीनो समूह $(-NH_2)$ होते हैं?
A
$Benzenediamine$
B
$Benzene-1,4-diamine$
C
$p-Aminoaniline$
D
$4-Aminobenzenamine$

Solution

(B) $1$. मूल हाइड्रोकार्बन बेंजीन है।
$2$. दो अमीनो समूह $(-NH_2)$ बेंजीन वलय की $1$ और $4$ स्थितियों पर जुड़े होते हैं।
$3$. $IUPAC$ नामकरण नियमों के अनुसार, जब दो समूह मौजूद होते हैं तो अमीन कार्यात्मक समूह के लिए प्रत्यय '$-diamine$' होता है।
$4$. इन्हें मिलाने पर, नाम $Benzene-1,4-diamine$ प्राप्त होता है।
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$CH_3CH=CHCH=CHCOOH$ यौगिक का $IUPAC$ नाम क्या है?
A
हेक्सेनडायोइक अम्ल
B
हेक्सा$-2,4-$डाईइनोइक अम्ल
C
पेंटा$-1,3-$डाईइनोइक अम्ल
D
पेंटेनडायोइक अम्ल

Solution

(B) चरण $1$: क्रियात्मक समूह युक्त सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला की पहचान करें। श्रृंखला में $6$ कार्बन परमाणु हैं।
चरण $2$: कार्बोक्सिलिक अम्ल समूह $(-COOH)$ से $C-1$ के रूप में श्रृंखला का अंकन शुरू करें।
चरण $3$: द्वि-आबंध $C-2$ और $C-4$ पर स्थित हैं।
चरण $4$: जनक एल्केन $\text{हेक्सेन}$ है। चूंकि दो द्वि-आबंध हैं, इसलिए प्रत्यय $-\text{डाईइनोइक}$ $\text{अम्ल}$ होगा।
चरण $5$: इन्हें संयोजित करने पर, नाम $\text{हेक्सा}-2,4-\text{डाईइनोइक}$ $\text{अम्ल}$ है।
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निम्नलिखित यौगिक का $IUPAC$ नाम क्या है?
Question diagram
A
$3$-मेथिल-$6$-एथिलसाइक्लोहेप्टेनॉल
B
$3$-एथिलसाइक्लोऑक्टेनॉल
C
$3$-एथिल-$6$-मेथिलसाइक्लोहेप्टेनॉल
D
$1$-एथिल-$5$-मेथिलसाइक्लोहेप्टेन-$3$-ऑल

Solution

(C) $1$. मुख्य क्रियात्मक समूह की पहचान करें: $-OH$ समूह मुख्य क्रियात्मक समूह है, इसलिए अनुलग्न $-\text{ऑल}$ $(-ol)$ होगा।
$2$. मुख्य श्रृंखला की पहचान करें: वलय में $7$ कार्बन परमाणु हैं, इसलिए मूल नाम साइक्लोहेप्टेनॉल है।
$3$. वलय का अंकन करें: $-OH$ समूह को स्थिति $1$ दें। प्रतिस्थापियों को न्यूनतम अंक देने के लिए वलय का अंकन करें। सही $IUPAC$ नाम $5$-एथिल-$2$-मेथिलसाइक्लोहेप्टेन-$1$-ऑल है। विकल्पों में से, $3$-एथिल-$6$-मेथिलसाइक्लोहेप्टेनॉल सबसे उपयुक्त विकल्प है।
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समजातीय श्रेणी (homologous series) के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य नहीं है?
A
श्रेणी के प्रत्येक सदस्य का कार्यात्मक समूह (functional group) समान होता है।
B
प्रत्येक सदस्य का कार्बन ढांचा (carbon skeleton) एक ही प्रकार का होता है।
C
प्रत्येक सदस्य अपने अगले सदस्य से एथिलीन समूह (ethylene group) द्वारा भिन्न होता है।
D
श्रेणी के सभी सदस्यों के रासायनिक गुण समान होते हैं।

Solution

(C) चरण $1$: समजातीय श्रेणी कार्बनिक यौगिकों का एक समूह है जिसमें समान कार्यात्मक समूह और समान रासायनिक गुण होते हैं।
चरण $2$: समजातीय श्रेणी के क्रमिक सदस्य एक मेथिलीन समूह $(-CH_2-)$ से भिन्न होते हैं, न कि एथिलीन समूह $(-C_2H_4-)$ से।
चरण $3$: इसलिए, यह कथन कि प्रत्येक सदस्य एथिलीन समूह से भिन्न होता है, गलत है।
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ड्राई क्लीनिंग सॉल्वैंट्स के लिए निम्नलिखित में से कौन सा एक हरित विकल्प है?
A
बेंजीन
B
कार्बन टेट्राक्लोराइड
C
परक्लोरोएथिलीन
D
सुपरक्रिटिकल $CO_2$

Solution

(D) चरण $1$: पारंपरिक रूप से, $CCl_4$ (कार्बन टेट्राक्लोराइड) का उपयोग ड्राई क्लीनिंग विलायक के रूप में किया जाता था, लेकिन यह एक कार्सिनोजेन है और लिवर को नुकसान पहुँचाता है।
चरण $2$: $Perchloroethylene$ का भी आमतौर पर उपयोग किया जाता है लेकिन यह भूजल के लिए विषाक्त है।
चरण $3$: सुपरक्रिटिकल $CO_2$ को एक हरित विकल्प माना जाता है क्योंकि यह गैर-विषाक्त, गैर-ज्वलनशील है और इसे पुनर्चक्रित किया जा सकता है, जो इसे ड्राई क्लीनिंग प्रक्रियाओं के लिए पर्यावरण के अनुकूल बनाता है।
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$25 \text{ }^\circ\text{C}$ पर $0.01 \text{ M}$ एकक्षारकीय अम्ल की मोलर चालकता $15 \text{ ohm}^{-1} \text{cm}^2 \text{mol}^{-1}$ है। अनंत तनुता पर उसी अम्ल की मोलर चालकता $375 \text{ ohm}^{-1} \text{cm}^2 \text{mol}^{-1}$ है। विलयन में $[H^+]$ की गणना कीजिए।
A
$4 \times 10^{-4} \text{ M}$
B
$5 \times 10^{-4} \text{ M}$
C
$2 \times 10^{-4} \text{ M}$
D
$3 \times 10^{-4} \text{ M}$

Solution

(A) चरण $1$: वियोजन की मात्रा $(\alpha)$ की गणना करें।
$\alpha = \frac{\Lambda_m^c}{\Lambda_m^\infty} = \frac{15}{375} = 0.04$।
चरण $2$: $[H^+]$ की सांद्रता की गणना करें।
एकक्षारकीय अम्ल $HA \rightleftharpoons H^+ + A^-$ के लिए, $[H^+] = C \times \alpha$।
दिया गया है $C = 0.01 \text{ M} = 10^{-2} \text{ M}$।
$[H^+] = 10^{-2} \times 0.04 = 4 \times 10^{-4} \text{ M}$।
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यदि $CH_3COO^-$ और $H^+$ आयनों के लिए अनंत तनुता पर मोलर चालकता क्रमशः $50 \text{ S cm}^2 \text{mol}^{-1}$ और $350 \text{ S cm}^2 \text{mol}^{-1}$ है, और $5 \times 10^{-2} \text{ M}$ $CH_3COOH$ की मोलर चालकता $20 \text{ S cm}^2 \text{mol}^{-1}$ है, तो $CH_3COOH$ में हाइड्रोजन आयन सांद्रता $\text{mol/dm}^3$ में क्या है?
A
$2.5 \times 10^{-3}$
B
$5 \times 10^{-3}$
C
$2.5 \times 10^{-4}$
D
$5 \times 10^{-4}$

Solution

(A) $1$. $CH_3COOH$ के लिए अनंत तनुता पर मोलर चालकता की गणना करें: $\Lambda_m^\circ(CH_3COOH) = \lambda^\circ(CH_3COO^-) + \lambda^\circ(H^+) = 50 + 350 = 400 \text{ S cm}^2 \text{mol}^{-1}$।
$2$. वियोजन की मात्रा $(\alpha)$ की गणना करें: $\alpha = \frac{\Lambda_m^c}{\Lambda_m^\circ} = \frac{20}{400} = 0.05$।
$3$. हाइड्रोजन आयन सांद्रता $[H^+]$ की गणना करें: $[H^+] = c \times \alpha = (5 \times 10^{-2} \text{ M}) \times 0.05 = 0.25 \times 10^{-2} = 2.5 \times 10^{-3} \text{ mol/dm}^3$।
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निम्नलिखित में से कौन सी संरचना $1,3\text{-ब्यूटाडाईन}$ को दर्शाती है?
A
Option A
B
Option B
C
Option C
D
Option D

Solution

(B) $1,3\text{-ब्यूटाडाईन}$ का आणविक सूत्र $C_4H_6$ है और इसमें चार कार्बन की श्रृंखला में $1$ और $3$ स्थितियों पर दो द्वि-आबंध (double bonds) होते हैं।
इसकी संरचना $CH_2=CH-CH=CH_2$ है।
विकल्प $(B)$ इस संरचना को दर्शाता है, जिसमें चार कार्बन की श्रृंखला में पहली और तीसरी स्थिति पर द्वि-आबंध हैं।
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ग्लिसरॉल का $IUPAC$ नाम है -
A
$Propane-1,2-diol$
B
$Propane-1,3-diol$
C
$Propane-1,2,3-triol$
D
$Propene-1,2,3-triol$

Solution

(C) चरण $1$: ग्लिसरॉल की रासायनिक संरचना $CH_2(OH)-CH(OH)-CH_2(OH)$ है।
चरण $2$: यह तीन कार्बन वाली श्रृंखला $(Propane)$ है जिसमें प्रत्येक कार्बन परमाणु से हाइड्रॉक्सिल समूह $(-OH)$ जुड़े होते हैं।
चरण $3$: चूँकि तीन $-OH$ समूह हैं, इसलिए अनुलग्न (suffix) $-triol$ होगा और उनकी स्थिति $1, 2, 3$ है।
चरण $4$: अतः, $IUPAC$ नाम $Propane-1,2,3-triol$ है।
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निम्नलिखित यौगिक का $IUPAC$ नाम क्या है?
Question diagram
A
$2,6$-डाइएथिलहेप्ट-$4$-ईन-$3$-ऑल
B
$2$-एथिल-$6$-मेथिलऑक्ट-$3$-ईन-$5$-ऑल
C
$3,7$-डाइमेथिलनॉन-$5$-ईन-$4$-ऑल
D
$7$-एथिल-$3$-मेथिल-ऑक्ट-$5$-ईन-$4$-ऑल

Solution

(C) $1$. मुख्य क्रियात्मक समूह $(-OH)$ और द्वि-आबंध युक्त सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला की पहचान करें। सबसे लंबी श्रृंखला में $9$ कार्बन हैं, इसलिए मूल एल्केन $nonane$ है।
$2$. मुख्य क्रियात्मक समूह $(-OH)$ को न्यूनतम अंक देने के लिए श्रृंखला का अंकन करें। दाईं से बाईं ओर अंकन करने पर $-OH$ समूह $4$ स्थिति पर आता है।
$3$. द्वि-आबंध $5$ स्थिति पर है। प्रतिस्थापी $3$ और $7$ स्थिति पर मेथिल समूह हैं।
$4$. इन्हें संयोजित करने पर, नाम $3,7$-डाइमेथिलनॉन-$5$-ईन-$4$-ऑल है।
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निम्नलिखित यौगिक का $IUPAC$ नाम क्या है?
Question diagram
A
$Pent-2-en-4-amine$
B
$Pent-3-en-2-amine$
C
$1-Methylbut-2-en-1-amine$
D
$4-Methylbut-2-en-4-amine$

Solution

(B) $1$. मुख्य क्रियात्मक समूह $(-NH_2)$ और द्वि-आबंध युक्त सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला की पहचान करें। श्रृंखला में $5$ कार्बन हैं, इसलिए मूल एल्केन $pentane$ है।
$2$. मुख्य क्रियात्मक समूह $(-NH_2)$ के निकटतम सिरे से श्रृंखला का अंकन करें। अतः, $-NH_2$ से जुड़ा कार्बन $C-2$ है।
$3$. द्वि-आबंध $C-3$ पर शुरू होता है। इसलिए, द्वि-आबंध के लिए अनुलग्न $-3-ene$ और एमीन के लिए $-2-amine$ है।
$4$. इन्हें संयोजित करने पर, $IUPAC$ नाम $Pent-3-en-2-amine$ है।
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$IUPAC$ प्रणाली के अनुसार बहु-कार्यात्मक यौगिकों के नामकरण के लिए मुख्य कार्यात्मक समूह के चयन का सही प्राथमिकता क्रम निम्नलिखित में से कौन सा है?
A
$-CHO > -CONH_2 > -OH > -C \equiv C-$
B
$-CONH_2 > -CHO > -OH > -C \equiv C-$
C
$-C \equiv C- > -OH > -CONH_2 > -CHO$
D
$-C \equiv C- > -CHO > -CONH_2 > -OH$

Solution

(B) कार्यात्मक समूहों के लिए $IUPAC$ प्राथमिकता नियमों के अनुसार, क्रम इस प्रकार है:
$1$. एमाइड $(-CONH_2)$ की प्राथमिकता एल्डिहाइड $(-CHO)$ से अधिक होती है।
$2$. एल्डिहाइड $(-CHO)$ की प्राथमिकता अल्कोहल $(-OH)$ से अधिक होती है।
$3$. अल्कोहल $(-OH)$ की प्राथमिकता एल्काइन $(-C \equiv C-)$ से अधिक होती है।
अतः, सही क्रम $-CONH_2 > -CHO > -OH > -C \equiv C-$ है।
इस प्रकार, विकल्प $B$ सही है।
221
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निम्नलिखित यौगिक का $IUPAC$ नाम क्या है?
Question diagram
A
बेंजोइक अम्ल
B
$2$-मेथिलबेंजोइक अम्ल
C
$o$-टोलुइक अम्ल
D
$2$-मेथिलसाइक्लोहेक्सिलकार्बोक्सिलिक अम्ल

Solution

(B) $1$. मुख्य श्रृंखला बेंजीन वलय है जिसमें कार्बोक्सिलिक अम्ल समूह $(-COOH)$ जुड़ा है, जिसे बेंजोइक अम्ल कहा जाता है।
$2$. मेथिल समूह $(-CH_3)$ $-COOH$ समूह के सापेक्ष ऑर्थो स्थिति पर जुड़ा है।
$3$. $IUPAC$ नामकरण में, $-COOH$ समूह से जुड़े कार्बन परमाणु को स्थिति $1$ दी जाती है। इसलिए मेथिल समूह स्थिति $2$ पर है।
$4$. अतः, $IUPAC$ नाम $2$-मेथिलबेंजोइक अम्ल है।
222
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निम्नलिखित यौगिक का $IUPAC$ नाम है,
Question diagram
A
$1, 1$-डाइएथिल-$4$-मेथॉक्सीसाइक्लोहेक्सेन
B
$1, 1$-डाइमेथिल-$4$-मेथॉक्सीसाइक्लोहेक्सेन
C
$4, 4$-डाइमेथिल-$1$-मेथॉक्सीसाइक्लोहेक्सेन
D
$4, 4$-डाइएथिल-$1$-मेथॉक्सीसाइक्लोहेक्सेन

Solution

(D) $1$. मुख्य श्रृंखला की पहचान करें: चक्रीय वलय एक साइक्लोहेक्सेन वलय है।
$2$. प्रतिस्थापियों की पहचान करें: वलय से एक मेथॉक्सी समूह $(-OCH_3)$ और दो एथिल समूह $(-CH_2CH_3)$ जुड़े हुए हैं।
$3$. अंकन: $IUPAC$ नियमों के अनुसार, मेथॉक्सी समूह को एक प्रतिस्थापी माना जाता है। हम वलय को इस प्रकार अंकन देते हैं कि प्रतिस्थापियों को न्यूनतम संभव स्थान मिले। मेथॉक्सी समूह से जुड़े कार्बन को स्थिति $1$ दें ताकि इसे सबसे कम संख्या मिले।
$4$. दो एथिल समूह स्थिति $4$ पर हैं। अतः, नाम $4, 4$-डाइएथिल-$1$-मेथॉक्सीसाइक्लोहेक्सेन है।
223
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निम्नलिखित में से किस विलयन की विद्युत चालकता सबसे अधिक होगी?
A
आसुत जल
B
चीनी का विलयन
C
नमक का विलयन
D
अल्कोहल का विलयन

Solution

(C) $1$. विलयन में विद्युत चालकता मुक्त आयनों की उपस्थिति पर निर्भर करती है जो आवेश का वहन कर सकते हैं।
$2$. आसुत जल एक कुचालक है क्योंकि इसमें बहुत कम आयन होते हैं।
$3$. चीनी का विलयन और अल्कोहल का विलयन गैर-विद्युत अपघट्य हैं; वे जल में आयनों में वियोजित नहीं होते हैं।
$4$. नमक का विलयन $(NaCl)$ एक प्रबल विद्युत अपघट्य है जो जल में पूरी तरह से $Na^+$ और $Cl^-$ आयनों में वियोजित हो जाता है, जिससे यह प्रभावी ढंग से विद्युत का संचालन कर सकता है।
$5$. अतः, नमक के विलयन की विद्युत चालकता सबसे अधिक होती है।
224
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क्लोरीन के सबसे दुर्बल ऑक्सीअम्ल (oxoacid) में क्लोरीन की ऑक्सीकरण अवस्था क्या है?
A
$+1$
B
$-1$
C
$+3$
D
$+5$

Solution

(A) $1$. क्लोरीन के ऑक्सीअम्ल $HOCl$ (हाइपोक्लोरस अम्ल), $HClO_2$ (क्लोरस अम्ल), $HClO_3$ (क्लोरिक अम्ल), और $HClO_4$ (परक्लोरिक अम्ल) हैं।
$2$. केंद्रीय परमाणु की ऑक्सीकरण अवस्था बढ़ने के साथ अम्लीय सामर्थ्य बढ़ती है। अतः, $HOCl$ सबसे दुर्बल ऑक्सीअम्ल है।
$3$. $HOCl$ में, मान लीजिए $Cl$ की ऑक्सीकरण अवस्था $x$ है। $H$ और $O$ की ऑक्सीकरण अवस्थाएँ क्रमशः $+1$ और $-2$ हैं।
$4$. $x + (+1) + (-2) = 0 \implies x - 1 = 0 \implies x = +1$।
225
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चारिंग (charring) प्रक्रिया में, सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल चीनी के साथ अभिक्रिया करके चीनी का चारकोल देता है। इस अभिक्रिया में सांद्र $H_2SO_4$ की क्या भूमिका है?
A
एक ऑक्सीकारक
B
एक सल्फोनेटिंग कारक
C
एक निर्जलीकरण कारक (dehydrating agent)
D
एक अपघटन कारक

Solution

(C) सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल $(H_2SO_4)$ द्वारा चीनी $(C_{12}H_{22}O_{11})$ के चारिंग की रासायनिक अभिक्रिया इस प्रकार है:
$C_{12}H_{22}O_{11} \xrightarrow{conc. H_2SO_4} 12C + 11H_2O$
इस अभिक्रिया में, सांद्र $H_2SO_4$ चीनी के अणु से जल के तत्वों ($H$ और $O$, $2:1$ के अनुपात में) को हटा देता है।
चूंकि यह यौगिक से जल के अणुओं को हटाता है, इसलिए यह एक निर्जलीकरण कारक (dehydrating agent) के रूप में कार्य करता है।
226
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ओजोन $(O_3)$ अणु में $O-O$ बंध लंबाई क्या है ($\text{ pm}$ में)?
A
$178$
B
$128$
C
$256$
D
$483$

Solution

(B) $1$. ओजोन $(O_3)$ अणु दो विहित संरचनाओं के बीच अनुनाद (resonance) प्रदर्शित करता है।
$2$. अनुनाद के कारण, $O-O$ बंध कोटि (bond order) $1.5$ होती है।
$3$. ओजोन में $O-O$ बंध की प्रायोगिक बंध लंबाई $128 \text{ pm}$ है, जो एकल बंध $(148 \text{ pm})$ और द्वि-बंध $(121 \text{ pm})$ के बीच का मान है।
227
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जब $KI$ अम्लीकृत पोटेशियम डाइक्रोमेट विलयन के साथ अभिक्रिया करता है, तो अंतिम उत्पाद में क्रोमियम की ऑक्सीकरण अवस्था क्या होती है?
A
$+2$
B
$+3$
C
$+6$
D
$+4$

Solution

(B) अम्लीकृत पोटेशियम डाइक्रोमेट $(K_2Cr_2O_7)$ और पोटेशियम आयोडाइड $(KI)$ के बीच की अभिक्रिया एक रेडॉक्स अभिक्रिया है।
इस अभिक्रिया में, डाइक्रोमेट आयन $(Cr_2O_7^{2-})$ एक ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करता है और क्रोमियम$(III)$ आयनों $(Cr^{3+})$ में अपचयित हो जाता है।
संतुलित रासायनिक समीकरण है: $K_2Cr_2O_7 + 7H_2SO_4 + 6KI \rightarrow 4K_2SO_4 + Cr_2(SO_4)_3 + 3I_2 + 7H_2O$।
क्रोमियम युक्त अंतिम उत्पाद क्रोमियम$(III)$ सल्फेट, $Cr_2(SO_4)_3$ है।
$Cr_2(SO_4)_3$ में, $Cr$ की ऑक्सीकरण अवस्था $+3$ है।
228
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वुर्ट्ज़ (Wurtz) अभिक्रिया निम्नलिखित में से किस एल्किल हैलाइड के साथ संभव नहीं है?
A
$(CH_3)_3CCl$
B
$CH_3Br$
C
$C_2H_5Cl$
D
$(C_2H_5)_2CH-I$

Solution

(A) $1$. वुर्ट्ज़ अभिक्रिया में शुष्क ईथर की उपस्थिति में सोडियम धातु के साथ दो एल्किल हैलाइड अणुओं का संयोजन होकर उच्च एल्केन बनते हैं।
$2$. यह अभिक्रिया मुक्त मूलक तंत्र या ऑर्गेनोमेटैलिक मध्यवर्ती के माध्यम से आगे बढ़ती है।
$3$. तृतीयक (tertiary) एल्किल हैलाइड, जैसे $(CH_3)_3CCl$, त्रिविम बाधा (steric hindrance) और बनने वाले एल्कीन के स्थायित्व के कारण संयोजन अभिक्रिया की तुलना में विलोपन अभिक्रिया (dehydrohalogenation) बहुत तेजी से करते हैं।
$4$. इसलिए, तृतीयक एल्किल हैलाइड से एल्केन के संश्लेषण के लिए वुर्ट्ज़ अभिक्रिया सामान्यतः उपयुक्त नहीं है।
229
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निम्नलिखित अभिक्रिया में क्रियाधार '$S$' की पहचान कीजिए: $S \xrightarrow{Na / \text{शुष्क ईथर}} 3, 4-\text{डाइएथिल}-3, 4-\text{डाइमेथिलहेक्सेन}$
A
$3-\text{क्लोरो}-2-\text{मेथिलपेंटेन}$
B
$2-\text{क्लोरो}-3-\text{मेथिलपेंटेन}$
C
$3-\text{क्लोरो}-3-\text{मेथिलपेंटेन}$
D
$2-\text{क्लोरो}-2-\text{मेथिलपेंटेन}$

Solution

(C) $1$. यह अभिक्रिया वुर्ट्ज़ अभिक्रिया है, जहाँ एक एल्किल हैलाइड शुष्क ईथर में $Na$ के साथ अभिक्रिया करके दो एल्किल मूलकों के संयोजन से एक सममित एल्केन बनाता है।
$2$. उत्पाद $3, 4-\text{डाइएथिल}-3, 4-\text{डाइमेथिलहेक्सेन}$ है। यह कुल $14$ कार्बन परमाणुओं वाला एक सममित एल्केन है।
$3$. क्रियाधार '$S$' को खोजने के लिए, हम उत्पाद को उस बंध पर तोड़ते हैं जो दो एल्किल समूहों के बीच बना है। यह बंध हेक्सेन श्रृंखला के $C3$ और $C4$ के बीच है।
$4$. अणु को तोड़ने पर $3-\text{क्लोरो}-3-\text{मेथिलपेंटेन}$ की दो समान इकाइयाँ प्राप्त होती हैं।
$5$. अतः, क्रियाधार '$S$' $3-\text{क्लोरो}-3-\text{मेथिलपेंटेन}$ है।
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जब $CH_3Br$ और $C_2H_5Br$ के मिश्रण को शुष्क ईथर की उपस्थिति में सोडियम धातु के साथ उपचारित किया जाता है, तो निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक प्राप्त नहीं होता है?
A
$n$-ब्यूटेन
B
एथेन
C
प्रोपेन
D
$2$-मेथिल प्रोपेन

Solution

(D) शुष्क ईथर में सोडियम के साथ एल्किल हैलाइडों के मिश्रण की अभिक्रिया को वुर्ट्ज़ अभिक्रिया कहा जाता है। जब $CH_3Br$ और $C_2H_5Br$ के मिश्रण का उपयोग किया जाता है, तो निम्नलिखित युग्मन अभिक्रियाएं होती हैं:
$1$. $CH_3Br + 2Na + CH_3Br \rightarrow CH_3-CH_3 (\text{एथेन}) + 2NaBr$
$2$. $C_2H_5Br + 2Na + C_2H_5Br \rightarrow C_2H_5-C_2H_5 (n\text{-ब्यूटेन}) + 2NaBr$
$3$. $CH_3Br + 2Na + C_2H_5Br \rightarrow CH_3-C_2H_5 (\text{प्रोपेन}) + 2NaBr$
चूंकि $2$-मेथिल प्रोपेन (आइसोब्यूटेन) एक शाखित एल्केन है, इसलिए यह इन रैखिक एल्किल हैलाइडों के सरल युग्मन द्वारा नहीं बन सकता है। अतः, यह प्राप्त नहीं होता है।
231
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निम्नलिखित निर्जलीकरण अभिक्रिया में मुख्य उत्पाद $X$ की पहचान कीजिए: $(CH_3)_3C-CH(OH)-CH_3 \xrightarrow{H_2SO_4} X$।
A
$2,3-\text{डाइमेथिल-2-ब्यूटीन}$
B
$3,3-\text{डाइमेथिल-1-ब्यूटीन}$
C
$2,3-\text{डाइमेथिल-1-ब्यूटीन}$
D
$3,3-\text{डाइमेथिल-2-ब्यूटीन}$

Solution

(A) चरण $1$: हाइड्रॉक्सिल समूह का प्रोटोनीकरण $(CH_3)_3C-CH(OH_2^+)-CH_3$ देता है।
चरण $2$: जल के अणु के निष्कासन से द्वितीयक कार्बोकेशन $(CH_3)_3C-CH^+-CH_3$ बनता है।
चरण $3$: अधिक स्थिर तृतीयक कार्बोकेशन $(CH_3)_2C^+-CH(CH_3)_2$ बनाने के लिए $1,2-\text{मेथिल शिफ्ट}$ होता है।
चरण $4$: ज़ेटसेव नियम के अनुसार, निकटवर्ती कार्बन परमाणु से प्रोटॉन का विलोपन सबसे स्थिर एल्कीन, $2,3-\text{डाइमेथिल-2-ब्यूटीन}$ प्रदान करता है।
232
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पायरोगैलोल $(Pyrogallol)$ का सही $IUPAC$ नाम चुनिए।
A
$Benzene-1,3-diol$
B
$Benzene-1,4-diol$
C
$Benzene-1,3,5-triol$
D
$Benzene-1,2,3-triol$

Solution

(D) पायरोगैलोल बेंजीन के एक ट्राईहाइड्रॉक्सी व्युत्पन्न का सामान्य नाम है।
इसकी संरचना में एक बेंजीन वलय होता है जिसमें $1, 2,$ और $3$ स्थितियों पर तीन हाइड्रॉक्सिल $(-OH)$ समूह जुड़े होते हैं।
अतः, इसका $IUPAC$ नाम $Benzene-1,2,3-triol$ है।
सही विकल्प $D$ है।
233
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फ्रीडल-क्राफ्ट्स एल्काइलेशन अभिक्रिया में निम्नलिखित में से किस स्पीशीज का उपयोग अभिकर्मक के रूप में किया जाता है?
A
$R - Cl$
B
$R - O - CH_3$
C
$R - OH$
D
$R - C(=O) - CH_3$

Solution

(A) $1$. फ्रीडल-क्राफ्ट्स एल्काइलेशन अभिक्रिया में एक एरोमैटिक वलय में एल्काइल समूह का प्रतिस्थापन शामिल होता है।
$2$. इसमें आमतौर पर निर्जल $AlCl_3$ जैसे लुईस अम्ल उत्प्रेरक की उपस्थिति में एल्काइल हैलाइड ($R - X$, जहाँ $X = Cl, Br, I$) का उपयोग किया जाता है।
$3$. दिए गए विकल्पों में से, $R - Cl$ एक एल्काइल हैलाइड है, जो एल्काइलेटिंग एजेंट के रूप में कार्य करता है।
$4$. अतः, फ्रीडल-क्राफ्ट्स एल्काइलेशन अभिक्रिया में $R - Cl$ का उपयोग किया जाता है।
234
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$40\% \ \text{H}_2\text{SO}_4$ और $1\% \ \text{HgSO}_4$ की उपस्थिति में प्रोपाइन की जल के साथ अभिक्रिया करने पर क्या बनता है?
A
प्रोपेन$-1-$ऑल
B
प्रोपेन$-2-$ऑल
C
प्रोपेनोन
D
प्रोपेनल

Solution

(C) चरण $1$: तनु $H_2SO_4$ और $HgSO_4$ की उपस्थिति में एल्काइन की जल के साथ अभिक्रिया को कुचेरोव अभिक्रिया कहा जाता है।
चरण $2$: प्रोपाइन $(CH_3-C \equiv CH)$ मार्कोवनिकोव नियम का पालन करते हुए जलयोजन अभिक्रिया करता है।
चरण $3$: त्रि-आबंध पर $H_2O$ के योग से एक अस्थाई इनोल मध्यवर्ती बनता है: $CH_3-C(OH)=CH_2$।
चरण $4$: यह इनोल चलावयवता (tautomerization) द्वारा एक स्थाई कीटोन में परिवर्तित हो जाता है, जो प्रोपेनोन $(CH_3-CO-CH_3)$ है।
235
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हरे पौधों में क्लोरोफिल में उपस्थित धनायन की पहचान कीजिए।
A
$Mg^{2+}$
B
$Ca^{2+}$
C
$Fr^+$
D
$Na^+$

Solution

(A) क्लोरोफिल एक मैग्नीशियम-पोरफाइरिन कॉम्प्लेक्स है। क्लोरोफिल अणु के पोरफाइरिन वलय के भीतर समन्वित केंद्रीय धातु आयन मैग्नीशियम आयन, $Mg^{2+}$ होता है।
अतः, सही विकल्प $A$ है।
236
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अल्कोहल बनाने के लिए एल्कीन के अम्लीय उत्प्रेरित जलयोजन (acid-catalyzed hydration) के प्रति अभिक्रियाशीलता का सही क्रम क्या है?
A
$3^\circ > 1^\circ > 2^\circ$
B
$3^\circ > 2^\circ > 1^\circ$
C
$1^\circ > 2^\circ > 3^\circ$
D
$1^\circ > 3^\circ > 2^\circ$

Solution

(B) $1$. एल्कीन का अम्लीय उत्प्रेरित जलयोजन इलेक्ट्रोफिलिक योग (electrophilic addition) की क्रियाविधि का पालन करता है।
$2$. दर-निर्धारक चरण (rate-determining step) में कार्बोनियम आयन (carbocation) मध्यवर्ती का निर्माण होता है।
$3$. कार्बोनियम आयन का स्थायित्व इस क्रम में होता है: $3^\circ > 2^\circ > 1^\circ$।
$4$. चूंकि अभिक्रिया की दर कार्बोनियम आयन के स्थायित्व पर निर्भर करती है, इसलिए जलयोजन के प्रति एल्कीन की अभिक्रियाशीलता का क्रम भी $3^\circ > 2^\circ > 1^\circ$ होता है।
237
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$Propene$ के हाइड्रोबोरेशन-ऑक्सीकरण द्वारा निम्नलिखित में से क्या प्राप्त होता है?
A
$Propanal$
B
$Propanone$
C
$Propan-1-ol$
D
$Propan-2-ol$

Solution

(C) चरण $1$: हाइड्रोबोरेशन-ऑक्सीकरण द्वि-आबंध पर जल का एंटी-मार्कोवनिकोव योग है।
चरण $2$: $Propene$ $(CH_3-CH=CH_2)$ की अभिक्रिया $BH_3$ के साथ और उसके बाद $H_2O_2/OH^-$ द्वारा ऑक्सीकरण करने पर $-OH$ समूह कम प्रतिस्थापित कार्बन परमाणु पर जुड़ता है।
चरण $3$: यह प्रक्रिया मुख्य उत्पाद के रूप में $propan-1-ol$ $(CH_3-CH_2-CH_2OH)$ प्रदान करती है।
238
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एक गैल्वेनिक सेल में एक निश्चित रेडॉक्स अभिक्रिया $X(s) + Y^{2+}(aq) \rightarrow X^{2+}(aq) + Y(s)$ के लिए, $298 \text{ K}$ पर $E^0_{cell} = 0.0296 \text{ V}$ है। अभिक्रिया का साम्य स्थिरांक $(K_c)$ क्या है?
A
$1$
B
$10$
C
$100$
D
$1000$

Solution

(B) मानक सेल विभव और साम्य स्थिरांक के बीच संबंध $298 \text{ K}$ पर इस प्रकार है: $E^0_{cell} = \frac{0.0591 \text{ V}}{n} \log K_c$।
यहाँ, स्थानांतरित इलेक्ट्रॉनों की संख्या $n = 2$ है।
मान रखने पर: $0.0296 = \frac{0.0591}{2} \log K_c$।
$0.0296 = 0.02955 \log K_c$।
$0.0296 \approx 0.02955$ का सन्निकटन करने पर, हमें $\log K_c \approx 1$ प्राप्त होता है।
अतः, $K_c = 10^1 = 10$।
239
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यदि चार इलेक्ट्रोड $A$, $B$, $C$ और $D$ के मानक अपचयन विभव क्रमशः $+2.5 \text{ V}$, $+3.0 \text{ V}$, $-2.0 \text{ V}$ और $-1.5 \text{ V}$ हैं, तो निम्नलिखित में से किस स्थिति में सेल का मानक $emf$ अधिकतम होगा?
A
$A$ एनोड है और $B$ कैथोड है
B
$B$ एनोड है और $D$ कैथोड है
C
$C$ एनोड है और $B$ कैथोड है
D
$B$ एनोड है और $C$ कैथोड है

Solution

(C) सेल का मानक $emf$ $E^0_{cell} = E^0_{cathode} - E^0_{anode}$ द्वारा दिया जाता है।
$E^0_{cell}$ को अधिकतम करने के लिए, हमें उच्चतम अपचयन विभव वाले इलेक्ट्रोड को कैथोड के रूप में और न्यूनतम अपचयन विभव वाले इलेक्ट्रोड को एनोड के रूप में चुनना होगा।
दिए गए विभव: $E^0_A = +2.5 \text{ V}$, $E^0_B = +3.0 \text{ V}$, $E^0_C = -2.0 \text{ V}$, $E^0_D = -1.5 \text{ V}$।
उच्चतम विभव $E^0_B = +3.0 \text{ V}$ (कैथोड) है।
न्यूनतम विभव $E^0_C = -2.0 \text{ V}$ (एनोड) है।
$E^0_{cell} = E^0_B - E^0_C = 3.0 \text{ V} - (-2.0 \text{ V}) = 5.0 \text{ V}$।
अतः, सेल का मान अधिकतम तब होता है जब $C$ एनोड हो और $B$ कैथोड हो।
240
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यदि $Zn$, $Ni$, और $Fe$ के मानक अपचयन विभव क्रमशः $-0.76 \text{ V}$, $-0.23 \text{ V}$, और $-0.44 \text{ V}$ हैं, तो अभिक्रिया $X(s) + Y^{+2}(aq) \rightarrow X^{+2}(aq) + Y(s)$ के स्वतः प्रवर्तित होने के लिए इलेक्ट्रोड $X$ और $Y$ ज्ञात कीजिए।
A
$X = Ni, Y = Fe$
B
$X = Ni, Y = Zn$
C
$X = Fe, Y = Zn$
D
$X = Zn, Y = Ni$

Solution

(D) किसी रेडॉक्स अभिक्रिया के स्वतः प्रवर्तित होने के लिए, मानक सेल विभव $E^0_{cell}$ धनात्मक होना चाहिए।
$E^0_{cell} = E^0_{cathode} - E^0_{anode} = E^0_{Y^{+2}/Y} - E^0_{X^{+2}/X} > 0$।
इसका अर्थ है $E^0_Y > E^0_X$।
दिए गए विभव: $E^0_{Zn} = -0.76 \text{ V}$, $E^0_{Fe} = -0.44 \text{ V}$, $E^0_{Ni} = -0.23 \text{ V}$।
विकल्प $D$ की जाँच करने पर: $X = Zn$ $(E^0 = -0.76 \text{ V})$ और $Y = Ni$ $(E^0 = -0.23 \text{ V})$।
$E^0_{cell} = -0.23 - (-0.76) = +0.53 \text{ V}$।
चूँकि $E^0_{cell} > 0$ है, इसलिए अभिक्रिया स्वतः प्रवर्तित है।
241
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शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए अभिकारक की सांद्रता $[A]_t$ और समय के बीच खींचे गए ग्राफ की ढाल (slope) का मान क्या है?
A
$-k$
B
$1/2k$
C
$k/2.303$
D
$303/k$

Solution

(A) शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए, समाकलित वेग समीकरण है: $[A]_t = -kt + [A]_0$।
इसकी तुलना सरल रेखा के समीकरण $y = mx + c$ से करने पर, जहाँ $y = [A]_t$, $x = t$, $m$ ढाल है, और $c$ अंतःखंड है।
यहाँ, $m = -k$ है।
अतः, $[A]_t$ बनाम समय के ग्राफ की ढाल $-k$ है।
242
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एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया के $90\%$ पूर्ण होने में लगा समय $1 \text{ hour}$ है। उसी अभिक्रिया के $99.9\%$ पूर्ण होने में लगा समय ज्ञात कीजिए।
A
$2 \text{ hours}$
B
$1 \text{ hour}$
C
$3 \text{ hours}$
D
$0.5 \text{ hour}$

Solution

(C) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए, दर स्थिरांक $k$ का सूत्र $k = \frac{2.303}{t} \log \frac{[A]_0}{[A]_t}$ है।
$90\%$ पूर्णता के लिए, $[A]_t = [A]_0 - 0.9[A]_0 = 0.1[A]_0$ और $t = 1 \text{ hour}$ है।
$k = \frac{2.303}{1} \log \frac{[A]_0}{0.1[A]_0} = 2.303 \log 10 = 2.303 \text{ h}^{-1}$।
$99.9\%$ पूर्णता के लिए, $[A]_t = [A]_0 - 0.999[A]_0 = 0.001[A]_0$ है।
$t = \frac{2.303}{k} \log \frac{[A]_0}{0.001[A]_0} = \frac{2.303}{2.303} \log 10^3 = 3 \log 10 = 3 \text{ hours}$।
243
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एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए, यदि प्रारंभिक सांद्रता $[A]_0 = 1.0 \text{ M}$ है और $t = 276 \text{ s}$ समय के बाद सांद्रता $[A]_t = 0.25 \text{ M}$ है, तो दर स्थिरांक $(k)$ का मान ज्ञात कीजिए। ($\text{ s}^{-1}$ में)
A
$0.0021$
B
$0.0050$
C
$0.003$
D
$0.006$

Solution

(B) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए, दर स्थिरांक $k$ का सूत्र है:
$k = \frac{2.303}{t} \log \frac{[A]_0}{[A]_t}$
दिया गया है:
$[A]_0 = 1.0 \text{ M}$
$[A]_t = 0.25 \text{ M}$
$t = 276 \text{ s}$
मान रखने पर:
$k = \frac{2.303}{276} \log \frac{1.0}{0.25}$
$k = \frac{2.303}{276} \log(4)$
चूंकि $\log(4) \approx 0.6021$:
$k = \frac{2.303 \times 0.6021}{276}$
$k \approx \frac{1.386}{276} \approx 0.00502 \text{ s}^{-1}$
अतः, $k \approx 0.0050 \text{ s}^{-1}$।
244
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यदि प्रथम कोटि की अभिक्रिया के $90\%$ पूर्ण होने में लगा समय '$t$' है, तो उसी तापमान पर अभिक्रिया के $99.9\%$ पूर्ण होने में कितना समय लगेगा?
A
$3t$
B
$2t$
C
$t$
D
$3t/2$

Solution

(A) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए, वेग स्थिरांक $k$ का सूत्र $k = \frac{2.303}{t} \log \left( \frac{[A]_0}{[A]_t} \right)$ है।
$90\%$ पूर्णता के लिए, $[A]_t = [A]_0 - 0.9[A]_0 = 0.1[A]_0$। अतः, $k = \frac{2.303}{t} \log \left( \frac{[A]_0}{0.1[A]_0} \right) = \frac{2.303}{t} \log(10) = \frac{2.303}{t}$।
$99.9\%$ पूर्णता के लिए, $[A]_t = [A]_0 - 0.999[A]_0 = 0.001[A]_0$। मान लीजिए समय $t'$ है।
$k = \frac{2.303}{t'} \log \left( \frac{[A]_0}{0.001[A]_0} \right) = \frac{2.303}{t'} \log(10^3) = \frac{2.303 \times 3}{t'}$।
$k$ के दोनों व्यंजकों की तुलना करने पर: $\frac{2.303}{t} = \frac{2.303 \times 3}{t'}$।
अतः, $t' = 3t$।
245
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शून्य कोटि की अभिक्रिया की अर्ध-आयु $1 \text{ hour}$ है। यदि अभिकारक की प्रारंभिक सांद्रता $2.0 \text{ mol L}^{-1}$ है, तो सांद्रता को $0.50 \text{ mol L}^{-1}$ से $0.25 \text{ mol L}^{-1}$ तक कम करने में लगा समय ज्ञात कीजिए। ($\text{ hour}$ में)
A
$0.25$
B
$0.50$
C
$0.75$
D
$1.00$

Solution

(A) शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए, दर स्थिरांक $k$ का मान $k = \frac{[A]_0}{2t_{1/2}}$ होता है।
दिया गया है $[A]_0 = 2.0 \text{ mol L}^{-1}$ और $t_{1/2} = 1 \text{ hour}$, अतः $k = \frac{2.0}{2 \times 1} = 1.0 \text{ mol L}^{-1} \text{ h}^{-1}$।
शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए सांद्रता को $[A]_1$ से $[A]_2$ तक बदलने में लगा समय $t = \frac{[A]_1 - [A]_2}{k}$ होता है।
मान रखने पर: $t = \frac{0.50 - 0.25}{1.0} = \frac{0.25}{1.0} = 0.25 \text{ hour}$।
246
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एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए, $20 \text{ mmol}$ अभिकारक $1.151 \text{ min}$ में घटकर $10 \text{ mmol}$ रह जाता है। दर स्थिरांक $k$ ज्ञात कीजिए। ($\text{ min}^{-1}$ में)
A
$0.6023$
B
$120$
C
$0.3010$
D
$0.10$

Solution

(A) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए, दर स्थिरांक $k$ का सूत्र है: $k = \frac{2.303}{t} \log \left( \frac{[A]_0}{[A]_t} \right)$।
दिया गया है: $[A]_0 = 20 \text{ mmol}$, $[A]_t = 10 \text{ mmol}$, $t = 1.151 \text{ min}$।
मान रखने पर: $k = \frac{2.303}{1.151} \log \left( \frac{20}{10} \right)$।
$k = 2 \times \log(2)$।
चूँकि $\log(2) \approx 0.3010$, $k = 2 \times 0.3010 = 0.6020 \text{ min}^{-1}$।
निकटतम विकल्प के अनुसार, सही उत्तर $0.6023 \text{ min}^{-1}$ है।
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एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया में, $20 \text{ mmol}$ अभिकारक $0.3010 \text{ min}$ में घटकर $10 \text{ mmol}$ रह जाता है। अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक ज्ञात कीजिए। ($\text{ min}^{-1}$ में)
A
$2.303$
B
$0.602$
C
$3.03$
D
$0.301$

Solution

(A) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए, वेग स्थिरांक $k$ का सूत्र है: $k = \frac{2.303}{t} \log \left( \frac{[A]_0}{[A]_t} \right)$।
दिया है: $[A]_0 = 20 \text{ mmol}$, $[A]_t = 10 \text{ mmol}$, $t = 0.3010 \text{ min}$।
मान रखने पर: $k = \frac{2.303}{0.3010} \log \left( \frac{20}{10} \right)$।
$k = \frac{2.303}{0.3010} \log(2)$।
चूँकि $\log(2) \approx 0.3010$, इसलिए: $k = \frac{2.303}{0.3010} \times 0.3010 = 2.303 \text{ min}^{-1}$।
248
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प्रथम कोटि की अभिक्रिया $A \rightarrow \text{उत्पाद}$ के लिए, दर स्थिरांक $k = 2 \times 10^{-2} \text{ s}^{-1}$ है। यदि $A$ की प्रारंभिक सांद्रता $[A]_0 = 1.0 \text{ mol dm}^{-3}$ है, तो $t = 100 \text{ s}$ के बाद $\log \frac{1}{[A]_t}$ का मान ज्ञात कीजिए।
A
$0.135$
B
$0.270$
C
$0.430$
D
$0.868$

Solution

(D) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए, समाकलित दर समीकरण है: $\ln \frac{[A]_0}{[A]_t} = kt$।
आधार $10$ के लघुगणक में बदलने पर: $2.303 \log \frac{[A]_0}{[A]_t} = kt$।
दिया गया है $[A]_0 = 1.0 \text{ mol dm}^{-3}$, $k = 2 \times 10^{-2} \text{ s}^{-1}$, और $t = 100 \text{ s}$।
मान रखने पर: $2.303 \log \frac{1.0}{[A]_t} = (2 \times 10^{-2} \text{ s}^{-1}) \times (100 \text{ s})$।
$2.303 \log \frac{1}{[A]_t} = 2$।
$\log \frac{1}{[A]_t} = \frac{2}{2.303} \approx 0.868$।
249
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यदि प्रथम कोटि की अभिक्रिया का वेग स्थिरांक $23.03 \text{ minute}^{-1}$ है, तो अभिक्रिया को $75 \%$ पूर्ण होने में कितना समय लगेगा ($\text{ s}$ में)?
A
$0.06$
B
$6$
C
$36$
D
$0.6$

Solution

(C) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए, वेग स्थिरांक $k$ का सूत्र है: $k = \frac{2.303}{t} \log \frac{[A]_0}{[A]_t}$।
दिया गया है $k = 23.03 \text{ min}^{-1}$।
$75 \%$ पूर्ण होने के लिए, $[A]_t = [A]_0 - 0.75[A]_0 = 0.25[A]_0$।
मान रखने पर: $23.03 = \frac{2.303}{t} \log \frac{[A]_0}{0.25[A]_0}$।
$23.03 = \frac{2.303}{t} \log(4)$।
$23.03 = \frac{2.303}{t} \times 0.602$।
$t = \frac{2.303 \times 0.602}{23.03} \text{ min} = 0.1 \times 0.602 \text{ min} = 0.0602 \text{ min}$।
सेकंड में बदलने पर: $t = 0.0602 \times 60 \text{ s} \approx 3.6 \text{ s}$।
चूंकि प्रश्न में दिए गए विकल्प गलत थे, गणना के आधार पर निकटतम मान $3.6 \text{ s}$ है।
250
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हाइड्रोजन पेरोक्साइड के अपघटन की दर स्थिरांक $0.0204 \text{ min}^{-1}$ है। अभिक्रिया की अर्ध-आयु की गणना कीजिए। ($\text{ min}$ में)
A
$56$
B
$33.97$
C
$51.50$
D
$68.70$

Solution

(B) हाइड्रोजन पेरोक्साइड का अपघटन एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया है।
प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए, अर्ध-आयु $(t_{1/2})$ का सूत्र है: $t_{1/2} = \frac{0.693}{k}$।
दिया गया दर स्थिरांक $k = 0.0204 \text{ min}^{-1}$ है।
सूत्र में $k$ का मान रखने पर: $t_{1/2} = \frac{0.693}{0.0204 \text{ min}^{-1}}$।
$t_{1/2} \approx 33.97 \text{ min}$।
251
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एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया $75\%$ वियोजन के लिए $30$ मिनट का समय लेती है। इसके वेग स्थिरांक की गणना कीजिए। ($\text{ min}^{-1}$ में)
A
$0.0238$
B
$0.0463$
C
$0.0715$
D
$0.0957$

Solution

(B) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए, वेग स्थिरांक $k$ का सूत्र है: $k = \frac{2.303}{t} \log \frac{[R]_0}{[R]}$
दिया है: $t = 30 \text{ min}$, $[R]_0 = 100$, $[R] = 100 - 75 = 25$।
मान रखने पर: $k = \frac{2.303}{30} \log \frac{100}{25}$
$k = \frac{2.303}{30} \log 4$
चूँकि $\log 4 \approx 0.6021$, $k = \frac{2.303 \times 0.6021}{30}$
$k \approx \frac{1.3866}{30} \approx 0.04622 \text{ min}^{-1}$।
चार दशमलव स्थानों तक पूर्णांकित करने पर, $k \approx 0.0463 \text{ min}^{-1}$।
252
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एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए, अर्ध-आयु $5 \text{ hour}$ है। $10 \text{ g}$ अभिकारक को $2.5 \text{ g}$ तक कम करने के लिए कितना समय आवश्यक है ($\text{ hour}$ में)?
A
$3$
B
$4$
C
$5$
D
$10$

Solution

(D) चरण $1$: आवश्यक अर्ध-आयु $(n)$ की संख्या ज्ञात कीजिए। अभिकारक की मात्रा इस प्रकार कम होती है: $10 \text{ g} \xrightarrow{t_{1/2}} 5 \text{ g} \xrightarrow{t_{1/2}} 2.5 \text{ g}$।
चरण $2$: अर्ध-आयु की संख्या गिनें। $10 \text{ g}$ को $2.5 \text{ g}$ तक कम करने में $2$ अर्ध-आयु लगती हैं।
चरण $3$: कुल समय $(t)$ की गणना करें। $t = n \times t_{1/2} = 2 \times 5 \text{ hour} = 10 \text{ hour}$।
253
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एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया की अर्ध-आयु $900 \text{ s}$ है। यदि अभिकारक की प्रारंभिक सांद्रता $0.08 \text{ mol dm}^{-3}$ है, तो $35 \text{ मिनट}$ के बाद शेष सांद्रता ज्ञात कीजिए?
A
$0.159 \text{ mol dm}^{-3}$
B
$0.0159 \text{ mol dm}^{-3}$
C
$0.05 \text{ mol dm}^{-3}$
D
$0.759 \text{ mol dm}^{-3}$

Solution

(B) चरण $1$: समय को सेकंड में बदलें। $t = 35 \text{ min} = 35 \times 60 \text{ s} = 2100 \text{ s}$।
चरण $2$: दर स्थिरांक $k$ की गणना करें: $k = \frac{0.693}{t_{1/2}} = \frac{0.693}{900 \text{ s}} = 7.7 \times 10^{-4} \text{ s}^{-1}$।
चरण $3$: प्रथम कोटि के समाकलित दर समीकरण का उपयोग करें: $[A] = [A]_0 e^{-kt}$।
$[A] = 0.08 \times e^{-(7.7 \times 10^{-4} \times 2100)} = 0.08 \times e^{-1.617} = 0.08 \times 0.1985 = 0.01588 \text{ mol dm}^{-3} \approx 0.0159 \text{ mol dm}^{-3}$।
254
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$1 \text{ मिनट } 40 \text{ सेकंड}$ की अर्ध-आयु वाली प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए दर स्थिरांक की गणना कीजिए।
A
$76 \times 10^{-3} \text{ s}^{-1}$
B
$31 \times 10^{-3} \text{ s}^{-1}$
C
$93 \times 10^{-3} \text{ s}^{-1}$
D
$61 \times 10^{-3} \text{ s}^{-1}$

Solution

(D) चरण $1$: अर्ध-आयु काल $(t_{1/2})$ को सेकंड में बदलें।
$t_{1/2} = 1 \text{ मिनट } 40 \text{ सेकंड} = 60 \text{ s} + 40 \text{ s} = 100 \text{ s}$।
चरण $2$: प्रथम कोटि की अभिक्रिया के दर स्थिरांक $(k)$ के सूत्र का उपयोग करें:
$k = \frac{0.693}{t_{1/2}}$।
चरण $3$: सूत्र में $t_{1/2}$ का मान रखें:
$k = \frac{0.693}{100 \text{ s}} = 0.00693 \text{ s}^{-1} = 6.93 \times 10^{-3} \text{ s}^{-1}$।
नोट: दिए गए विकल्पों में, निकटतम मान $6.93 \times 10^{-3} \text{ s}^{-1}$ है, जो विकल्प $D$ के अनुरूप है।
255
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वेग स्थिरांक $k$ के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य नहीं है?
A
यह वेग नियम में एक समानुपाती स्थिरांक है जो अभिक्रिया वेग को अभिकारक सांद्रता से संबंधित करता है।
B
यह अभिकारकों की सांद्रता से स्वतंत्र होता है।
C
यह तापमान के साथ बदलता है।
D
वेग स्थिरांक का मान जितना अधिक होता है, अभिक्रिया उतनी ही धीमी होती है।

Solution

(D) चरण $1$: वेग नियम को $\text{Rate} = k[A]^x[B]^y$ के रूप में व्यक्त किया जाता है। यहाँ, $k$ वेग स्थिरांक है।
चरण $2$: $k$ अभिकारकों की प्रारंभिक सांद्रता से स्वतंत्र होता है, लेकिन यह तापमान पर निर्भर करता है (आरेनियस समीकरण: $k = Ae^{-E_a/RT}$)।
चरण $3$: $k$ का बड़ा मान एक निश्चित सांद्रता के लिए तीव्र अभिक्रिया दर को दर्शाता है। इसलिए, यह कथन कि $k$ का अधिक मान अभिक्रिया को धीमा बनाता है, गलत है।
256
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अभिक्रिया की कोटि के संबंध में निम्नलिखित में से सही कथन की पहचान कीजिए।
A
शून्य कोटि की अभिक्रिया की दर अभिकारक की प्रारंभिक सांद्रता पर निर्भर करती है।
B
ऐसीटैल्डिहाइड का अपघटन एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया है।
C
प्रथम कोटि की अभिक्रिया का अर्ध-आयु काल अभिकारक की प्रारंभिक सांद्रता से स्वतंत्र होता है।
D
शून्य कोटि की अभिक्रिया का अर्ध-आयु काल अभिकारक की प्रारंभिक सांद्रता से स्वतंत्र होता है।

Solution

(C) चरण $1$: शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए, दर स्थिर होती है और प्रारंभिक सांद्रता पर निर्भर नहीं करती है, इसलिए $(A)$ गलत है।
चरण $2$: ऐसीटैल्डिहाइड का अपघटन $(CH_3CHO \rightarrow CH_4 + CO)$ एक द्वितीय कोटि की अभिक्रिया है, इसलिए $(B)$ गलत है।
चरण $3$: प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए, अर्ध-आयु काल $t_{1/2} = \frac{0.693}{k}$ द्वारा दिया जाता है, जो प्रारंभिक सांद्रता $[R]_0$ से स्वतंत्र है। अतः, $(C)$ सही है।
चरण $4$: शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए, अर्ध-आयु काल $t_{1/2} = \frac{[R]_0}{2k}$ है, जो प्रारंभिक सांद्रता पर निर्भर करता है। अतः, $(D)$ गलत है।
257
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निम्नलिखित अभिक्रिया की कोटि क्या है: $2H_2O_2(l) \rightarrow 2H_2O(l) + O_2(g)$, यदि दर नियम $\text{rate} = k[H_2O_2]^1$ है?
A
$0$
B
$1$
C
$2$
D
$3$

Solution

(B) अभिक्रिया की कोटि को दर नियम व्यंजक में सांद्रता पदों की घातों के योग के रूप में परिभाषित किया जाता है।
दिया गया दर नियम: $\text{rate} = k[H_2O_2]^1$ है।
सांद्रता पद $[H_2O_2]$ की घात $1$ है।
अतः, अभिक्रिया की कोटि $1$ है।
258
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अभिक्रिया की उस कोटि की पहचान कीजिए जिसके लिए वेग स्थिरांक का मात्रक $\text{mol dm}^{-3} \text{s}^{-1}$ है।
A
$0$
B
$1$
C
$2$
D
$3$

Solution

(A) $n$ कोटि की अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक $k$ का सामान्य मात्रक सूत्र $(\text{mol dm}^{-3})^{1-n} \text{s}^{-1}$ द्वारा दिया जाता है।
शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए, $n = 0$ होता है।
सूत्र में $n = 0$ रखने पर: $(\text{mol dm}^{-3})^{1-0} \text{s}^{-1} = \text{mol dm}^{-3} \text{s}^{-1}$ प्राप्त होता है।
अतः, यह अभिक्रिया शून्य कोटि की है।
259
ChemistryMediumMCQMHT CET · 2026
अभिक्रिया $2A \rightarrow 3C + D$ के लिए, अभिक्रिया की दर को किसके द्वारा दर्शाया जाता है?
A
$-\frac{d[A]}{dt} = -\frac{d[D]}{dt}$
B
$-\frac{d[C]}{dt} = -2\frac{d[A]}{dt}$
C
$-\frac{d[A]}{dt} = \frac{d[D]}{dt}$
D
$-\frac{1}{2} \frac{d[A]}{dt} = +\frac{1}{3} \frac{d[C]}{dt}$

Solution

(D) एक सामान्य अभिक्रिया $aA + bB \rightarrow cC + dD$ के लिए, अभिक्रिया की दर इस प्रकार दी जाती है:
दर $= -\frac{1}{a} \frac{d[A]}{dt} = -\frac{1}{b} \frac{d[B]}{dt} = +\frac{1}{c} \frac{d[C]}{dt} = +\frac{1}{d} \frac{d[D]}{dt}$।
दी गई अभिक्रिया $2A \rightarrow 3C + D$ के लिए, रससमीकरणमितीय गुणांक $a=2, c=3, d=1$ हैं।
अतः, अभिक्रिया की दर है: दर $= -\frac{1}{2} \frac{d[A]}{dt} = +\frac{1}{3} \frac{d[C]}{dt} = +\frac{d[D]}{dt}$।
विकल्पों के साथ तुलना करने पर, विकल्प $D$ सही है।
260
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अभिक्रिया $3I^-_{(aq)} + S_2O_8^{2-} (aq) \rightarrow I_3^- (aq) + 2SO_4^{2-} (aq)$ पर विचार कीजिए। यदि किसी विशेष समय पर $SO_4^{2-}$ के बनने की दर $2.2 \times 10^{-2} \text{ mol dm}^{-3} \text{s}^{-1}$ है, तो $I^-$ के उपभोग की दर की गणना कीजिए।
A
$1.1 \times 10^{-2} \text{ mol dm}^{-3} \text{s}^{-1}$
B
$2.2 \times 10^{-2} \text{ mol dm}^{-3} \text{s}^{-1}$
C
$3.3 \times 10^{-2} \text{ mol dm}^{-3} \text{s}^{-1}$
D
$4.4 \times 10^{-2} \text{ mol dm}^{-3} \text{s}^{-1}$

Solution

(C) अभिक्रिया की दर को निम्न व्यंजक द्वारा दर्शाया जाता है:
$\text{दर} = -\frac{1}{3} \frac{d[I^-]}{dt} = \frac{1}{2} \frac{d[SO_4^{2-}]}{dt}$
दिया गया है कि $SO_4^{2-}$ के बनने की दर $\frac{d[SO_4^{2-}]}{dt} = 2.2 \times 10^{-2} \text{ mol dm}^{-3} \text{s}^{-1}$ है।
हमें $I^-$ के उपभोग की दर, यानी $-\frac{d[I^-]}{dt}$ ज्ञात करनी है।
व्यंजक से: $-\frac{d[I^-]}{dt} = \frac{3}{2} \times \frac{d[SO_4^{2-}]}{dt}$
$-\frac{d[I^-]}{dt} = \frac{3}{2} \times (2.2 \times 10^{-2} \text{ mol dm}^{-3} \text{s}^{-1})$
$-\frac{d[I^-]}{dt} = 3.3 \times 10^{-2} \text{ mol dm}^{-3} \text{s}^{-1}$।
261
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अभिक्रिया $2N_2O_5(g) \rightarrow 4 NO_2(g) + O_2(g)$ में, $N_2O_5$ के लुप्त होने की दर $0.06 \text{ mol dm}^{-3} \text{s}^{-1}$ है। $O_2(g)$ के बनने की दर की गणना कीजिए।
A
$0.02 \text{ mol dm}^{-3} \text{s}^{-1}$
B
$0.03 \text{ mol dm}^{-3} \text{s}^{-1}$
C
$0.04 \text{ mol dm}^{-3} \text{s}^{-1}$
D
$0.06 \text{ mol dm}^{-3} \text{s}^{-1}$

Solution

(B) अभिक्रिया की दर को निम्न व्यंजक द्वारा दर्शाया जाता है:
दर $= -\frac{1}{2} \frac{d[N_2O_5]}{dt} = \frac{1}{4} \frac{d[NO_2]}{dt} = \frac{d[O_2]}{dt}$
दिया गया है कि $N_2O_5$ के लुप्त होने की दर $-\frac{d[N_2O_5]}{dt} = 0.06 \text{ mol dm}^{-3} \text{s}^{-1}$ है।
इसे दर व्यंजक में प्रतिस्थापित करने पर:
दर $= \frac{1}{2} \times (0.06 \text{ mol dm}^{-3} \text{s}^{-1}) = 0.03 \text{ mol dm}^{-3} \text{s}^{-1}$।
चूंकि $O_2$ के बनने की दर अभिक्रिया की दर के बराबर है:
$O_2$ के बनने की दर $= 0.03 \text{ mol dm}^{-3} \text{s}^{-1}$।
262
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निम्नलिखित में से किस नैनो-पदार्थ की तीनों विमाएँ (dimensions) $< 100 \text{ nm}$ होती हैं?
A
नैनोट्यूब
B
नैनोवायर
C
नैनोशेल
D
पतली फिल्में (Thin films)

Solution

(C) $1$. नैनो-पदार्थों को उन विमाओं की संख्या के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है जो नैनोस्केल सीमा $(< 100 \text{ nm})$ से बाहर होती हैं।
$2$. वह पदार्थ जिसकी तीनों विमाएँ नैनोस्केल सीमा $(< 100 \text{ nm})$ के भीतर होती हैं, उसे शून्य-विमीय $(0D)$ नैनो-पदार्थ कहा जाता है, जैसे नैनोपार्टिकल्स या नैनोशेल।
$3$. नैनोट्यूब और नैनोवायर एक-विमीय $(1D)$ नैनो-पदार्थ हैं (इनकी दो विमाएँ $< 100 \text{ nm}$ होती हैं)।
$4$. पतली फिल्में द्वि-विमीय $(2D)$ नैनो-पदार्थ हैं (इनकी एक विमा $< 100 \text{ nm}$ होती है)।
$5$. अतः, नैनोशेल सही उत्तर है।
263
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नैनोकणों (nanoparticles) की आयामी प्रकृति की पहचान कीजिए।
A
एक-आयामी
B
द्वि-आयामी
C
चार-आयामी
D
शून्य-आयामी

Solution

(D) नैनोकणों को उन सामग्रियों के रूप में परिभाषित किया जाता है जिनका कम से कम एक आयाम $1-100 \text{ nm}$ की सीमा में होता है। हालाँकि, नैनोस्केल के बाहर के आयामों की संख्या के आधार पर वर्गीकरण के संदर्भ में, नैनोकणों को आमतौर पर $0$-आयामी संरचना माना जाता है जहाँ तीनों आयाम नैनोस्केल सीमा $(< 100 \text{ nm})$ के भीतर होते हैं।
264
ChemistryMediumMCQMHT CET · 2026
निम्नलिखित में से कौन सी नैनो संरचनाओं में नैनोट्यूब एक उदाहरण के रूप में शामिल है?
A
शून्य विमीय
B
एक विमीय
C
द्वि विमीय
D
त्रि विमीय

Solution

(B) नैनो संरचनाओं को उन आयामों की संख्या के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है जो नैनोमीटर सीमा $(1-100 \text{ nm})$ से बाहर हैं।
$(1)$ शून्य-विमीय $(0D)$ संरचनाओं में तीनों आयाम नैनोमीटर सीमा में होते हैं (जैसे, नैनोकण)।
$(2)$ एक-विमीय $(1D)$ संरचनाओं में दो आयाम नैनोमीटर सीमा में होते हैं, जबकि तीसरा आयाम बहुत बड़ा होता है (जैसे, नैनोट्यूब, नैनोवायर)।
$(3)$ द्वि-विमीय $(2D)$ संरचनाओं में एक आयाम नैनोमीटर सीमा में होता है (जैसे, पतली फिल्में, ग्राफीन)।
$(4)$ त्रि-विमीय $(3D)$ संरचनाओं में सभी आयाम नैनोमीटर सीमा से बाहर होते हैं (जैसे, थोक पदार्थ)।
अतः, नैनोट्यूब को एक-विमीय नैनो संरचनाओं के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
265
ChemistryMediumMCQMHT CET · 2026
निम्नलिखित में से कौन सा थिन फिल्म (पतली परत) पर लागू होता है?
A
एक-आयामी नैनोस्ट्रक्चर
B
शून्य-आयामी नैनोस्ट्रक्चर
C
दो-आयामी नैनोस्ट्रक्चर
D
तीन-आयामी नैनोस्ट्रक्चर

Solution

(C) थिन फिल्म सामग्री की एक परत होती है जिसकी मोटाई नैनोमीटर के अंश से लेकर कई माइक्रोमीटर तक होती है। थिन फिल्म में, केवल एक आयाम (मोटाई) नैनोमीटर सीमा में होता है, जबकि अन्य दो आयाम काफी बड़े होते हैं। इसलिए, इसे दो-आयामी नैनोस्ट्रक्चर के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
266
ChemistryMediumMCQMHT CET · 2026
नैनो-सामग्रियों (Nanomaterials) का उपयोग आमतौर पर निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में नहीं किया जाता है?
A
स्क्रैच-प्रूफ ग्लास का निर्माण
B
इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
C
पारंपरिक जल उपचार
D
स्वयं-सफाई सामग्री (Self-cleaning materials)

Solution

(C) $1$. नैनो-सामग्रियों में उनके छोटे आकार $(1-100 \text{ nm})$ के कारण अद्वितीय गुण होते हैं।
$2$. इनका उपयोग स्क्रैच-प्रूफ ग्लास, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और स्वयं-सफाई वाली सतहों (जैसे लोटस इफेक्ट) के निर्माण में किया जाता है।
$3$. पारंपरिक जल उपचार (Conventional water treatment) निस्पंदन, अवसादन और क्लोरीनीकरण जैसी पारंपरिक विधियों पर निर्भर करता है, न कि नैनो-तकनीक पर।
$4$. इसलिए, पारंपरिक जल उपचार सही उत्तर है।
267
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उस नैनोमटेरियल की पहचान करें जिसके तीनों आयाम $100 \text{ nm}$ से कम हैं?
A
फाइबर (तंतु)
B
थिन फिल्म्स (पतली परतें)
C
क्वांटम डॉट्स
D
नैनोट्यूब्स

Solution

(C) $1$. नैनोमटेरियल को उन आयामों की संख्या के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है जो नैनोस्केल रेंज ($100 \text{ nm}$ से कम) में होते हैं।
$2$. फाइबर में दो आयाम नैनोस्केल रेंज में होते हैं।
$3$. थिन फिल्म्स में एक आयाम नैनोस्केल रेंज में होता है।
$4$. क्वांटम डॉट्स शून्य-आयामी नैनोमटेरियल हैं, जिसका अर्थ है कि तीनों आयाम नैनोस्केल रेंज ($100 \text{ nm}$ से कम) में होते हैं।
$5$. नैनोट्यूब्स में दो आयाम नैनोस्केल रेंज में होते हैं।
$6$. अतः, क्वांटम डॉट्स सही उत्तर है।
268
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निम्नलिखित में से कणों के आकार की कौन सी सीमा नैनो स्केल को परिभाषित करती है?
A
$10-100 \text{ nm}$
B
$1000-2000 \text{ nm}$
C
$1-100 \text{ nm}$
D
$100-1000 \text{ nm}$

Solution

(C) नैनो स्केल को सामान्यतः आयामों की उस सीमा के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ पदार्थ अपने छोटे आकार के कारण अद्वितीय भौतिक और रासायनिक गुण प्रदर्शित करते हैं। अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के अनुसार, नैनो स्केल को $1 \text{ nm}$ से $100 \text{ nm}$ की सीमा के रूप में परिभाषित किया गया है।
269
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निम्नलिखित में से किस नैनोमटेरियल का केवल एक आयाम $< 100 \text{ nm}$ होता है?
A
क्वांटम डॉट्स
B
नैनोरिंग्स
C
थिन फिल्म्स (पतली परतें)
D
नैनोवायर

Solution

(C) $1$. नैनोमटेरियल्स को उन आयामों की संख्या के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है जो नैनोस्केल रेंज $(< 100 \text{ nm})$ में होते हैं।
$2$. क्वांटम डॉट्स के तीनों आयाम नैनोस्केल रेंज में होते हैं ($0D$ नैनोमटेरियल्स)।
$3$. नैनोवायर और नैनोट्यूब के दो आयाम नैनोस्केल रेंज में होते हैं ($1D$ नैनोमटेरियल्स)।
$4$. थिन फिल्म्स या कोटिंग्स का केवल एक आयाम नैनोस्केल रेंज में होता है ($2D$ नैनोमटेरियल्स)।
$5$. अतः, थिन फिल्म्स सही उत्तर है।
270
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निम्नलिखित में से कौन सा जल-में-तेल $(W/O)$ प्रकार का पायस (emulsion) है?
A
दूध
B
वैनिशिंग क्रीम
C
पेंट
D
मक्खन

Solution

(D) $1$. पायस (emulsion) कोलाइडल निकाय हैं जहाँ परिक्षिप्त प्रावस्था और परिक्षेपण माध्यम दोनों द्रव होते हैं।
$2$. जल-में-तेल $(W/O)$ पायस में, जल परिक्षिप्त प्रावस्था है और तेल परिक्षेपण माध्यम है।
$3$. $W/O$ पायस के उदाहरणों में मक्खन, कोल्ड क्रीम और कॉड लिवर ऑयल शामिल हैं।
$4$. दूध और वैनिशिंग क्रीम तेल-में-जल $(O/W)$ पायस के उदाहरण हैं, जहाँ जल परिक्षेपण माध्यम होता है।
$5$. अतः, मक्खन जल-में-तेल पायस का सही उदाहरण है।
271
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निम्नलिखित में से कौन सा तेल-इन-जल $(O/W)$ इमल्शन का उदाहरण नहीं है?
A
पेंट
B
मक्खन
C
वैनिशिंग क्रीम
D
दूध

Solution

(B) $1$. इमल्शन एक कोलाइडल प्रणाली है जहाँ परिक्षिप्त प्रावस्था और परिक्षेपण माध्यम दोनों द्रव होते हैं।
$2$. तेल-इन-जल $(O/W)$ इमल्शन में, तेल परिक्षिप्त प्रावस्था है और जल परिक्षेपण माध्यम है।
$3$. दूध और वैनिशिंग क्रीम $O/W$ इमल्शन के उदाहरण हैं।
$4$. मक्खन एक जल-इन-तेल $(W/O)$ इमल्शन है, जहाँ जल परिक्षिप्त प्रावस्था है और तेल (वसा) परिक्षेपण माध्यम है।
$5$. अतः, मक्खन तेल-इन-जल इमल्शन का उदाहरण नहीं है।
272
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सूची $I$ को सूची $II$ के साथ सुमेलित कीजिए:
सूची $I$सूची $II$
$(A)$. ब्राउनी गति$(I)$. अर्धपारगम्य झिल्ली का उपयोग करके कोलाइडल सॉल से अशुद्धियों को दूर करना।
$(B)$. टिंडल प्रभाव$(II)$. विद्युत क्षेत्र के प्रभाव में कोलाइडल कणों की गति।
$(C)$. वैद्युत कण संचलन (इलेक्ट्रोफोरेसिस)$(III)$. गतिज ऊर्जा के कारण कोलाइडल कणों की यादृच्छिक गति।
$(D)$. अपोहन (डायलिसिस)$(IV)$. कोलाइडल कणों द्वारा प्रकाश का प्रकीर्णन
A
$(A)$-$(I)$, $(B)$-$(II)$, $(C)$-$(III)$, $(D)$-$(IV)$
B
$(A)$-$(II)$, $(B)$-$(IV)$, $(C)$-$(I)$, $(D)$-$(III)$
C
$(A)$-$(I)$, $(B)$-$(II)$, $(C)$-$(IV)$, $(D)$-$(III)$
D
$(A)$-$(III)$, $(B)$-$(IV)$, $(C)$-$(II)$, $(D)$-$(I)$

Solution

(D) चरण $1$: दिए गए कोलाइडल परिघटनाओं की परिभाषाओं का विश्लेषण करें।
चरण $2$: ब्राउनी गति परिक्षेपण माध्यम के अणुओं के साथ टक्कर के कारण कोलाइडल कणों की यादृच्छिक, टेढ़ी-मेढ़ी गति है, जो $(III)$ के अनुरूप है।
चरण $3$: टिंडल प्रभाव कोलाइडल कणों द्वारा प्रकाश का प्रकीर्णन है, जो $(IV)$ के अनुरूप है।
चरण $4$: वैद्युत कण संचलन (इलेक्ट्रोफोरेसिस) विद्युत क्षेत्र के प्रभाव में आवेशित कोलाइडल कणों की गति है, जो $(II)$ के अनुरूप है।
चरण $5$: अपोहन (डायलिसिस) अर्धपारगम्य झिल्ली का उपयोग करके कोलाइडल सॉल से अशुद्धियों को दूर करने की प्रक्रिया है, जो $(I)$ के अनुरूप है।
चरण $6$: युग्मों का मिलान: $(A)$-$(III)$, $(B)$-$(IV)$, $(C)$-$(II)$, $(D)$-$(I)$। यह विकल्प $(D)$ से मेल खाता है।
273
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धनावेशित फेरिक ऑक्साइड सॉल के अवक्षेपण के लिए निम्नलिखित में से किसकी स्कंदन शक्ति (coagulating power) न्यूनतम होती है?
A
$KNO_3$
B
$K_2SO_4$
C
$K_3PO_4$
D
$K_4[Fe(CN)_6]$

Solution

(A) $1$. हार्डी-शुल्ज़ नियम के अनुसार, किसी विद्युत-अपघट्य की स्कंदन शक्ति सक्रिय आयन (कोलाइडल सॉल के विपरीत आवेश वाला आयन) की संयोजकता पर निर्भर करती है।
$2$. फेरिक ऑक्साइड सॉल धनावेशित होता है, इसलिए स्कंदन शक्ति ऋणायन (anion) की संयोजकता पर निर्भर करती है।
$3$. विद्युत-अपघट्यों द्वारा प्रदान किए गए ऋणायन हैं: $NO_3^-$ (संयोजकता $1$), $SO_4^{2-}$ (संयोजकता $2$), $PO_4^{3-}$ (संयोजकता $3$), और $[Fe(CN)_6]^{4-}$ (संयोजकता $4$)।
$4$. हार्डी-शुल्ज़ नियम के अनुसार, विपरीत आवेशित आयन की संयोजकता बढ़ने पर स्कंदन शक्ति बढ़ती है।
$5$. अतः, सबसे कम संयोजकता $(NO_3^-)$ वाले आयन की स्कंदन शक्ति न्यूनतम होगी।
274
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कोलाइड्स (colloids) में रंग के विकास के लिए निम्नलिखित में से कौन सा गुण जिम्मेदार है?
A
टिंडल प्रभाव (Tyndall effect)
B
ब्राउनी गति (Brownian motion)
C
प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering of light)
D
विद्युत-परासरण (Electro-osmosis)

Solution

(C) कोलाइडल विलयनों का रंग परिक्षिप्त कणों द्वारा प्रकीर्णित प्रकाश की तरंग दैर्ध्य पर निर्भर करता है। प्रकाश की तरंग दैर्ध्य कणों के आकार और प्रकृति पर निर्भर करती है। इसलिए, प्रकाश का प्रकीर्णन कोलाइड्स में रंग के विकास के लिए जिम्मेदार है।
275
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निम्नलिखित में से किस ऋणायन (anion) की धनावेशित सॉल (positively charged sol) के स्कंदन (coagulation) के लिए सबसे अधिक क्षमता होती है?
A
$Cl^-$
B
$[Fe(CN)_6]^{4-}$
C
$PO_4^{3-}$
D
$SO_4^{2-}$

Solution

(B) हार्डी-शुल्ज़ नियम (Hardy-Schulze rule) के अनुसार, स्कंदन के लिए उपयोग किए जाने वाले आयन पर आवेश का परिमाण जितना अधिक होता है, उसकी स्कंदन क्षमता उतनी ही अधिक होती है।
धनावेशित सॉल के लिए, ऋणायनों की स्कंदन क्षमता का क्रम इस प्रकार है: $[Fe(CN)_6]^{4-} > PO_4^{3-} > SO_4^{2-} > Cl^-$।
चूंकि $[Fe(CN)_6]^{4-}$ पर सबसे अधिक ऋणात्मक आवेश $(-4)$ है, इसलिए इसकी स्कंदन क्षमता सबसे अधिक है।
276
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निम्नलिखित में से द्रव-स्नेही (lyophilic) कोलाइड के संबंध में सही कथन की पहचान कीजिए।
A
यह अनुत्क्रमणीय (irreversible) होता है।
B
यह विलायक-विरोधी कोलाइड है।
C
यह केवल विशेष विधियों द्वारा बनाया जाता है।
D
यह विलायक-स्नेही कोलाइड है।

Solution

(D) $1$. द्रव-स्नेही कोलाइड 'विलायक-स्नेही' (solvent-loving) कोलाइड होते हैं।
$2$. इनमें परिक्षिप्त प्रावस्था और परिक्षेपण माध्यम के बीच गहरा आकर्षण होता है।
$3$. ये प्रकृति में उत्क्रमणीय (reversible) होते हैं, जिसका अर्थ है कि वाष्पीकरण के बाद परिक्षिप्त प्रावस्था को परिक्षेपण माध्यम के साथ मिलाकर इन्हें आसानी से पुनः प्राप्त किया जा सकता है।
$4$. ये सीधे मिलाने या गर्म करने से बनते हैं।
$5$. अतः, सही कथन यह है कि यह एक विलायक-स्नेही कोलाइड है।
277
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निम्नलिखित में से कौन सा वृहद्-अणुक (macromolecular) कोलाइड का एक उदाहरण है?
A
प्रोटीन
B
अपमार्जक (Detergents)
C
साबुन
D
$S_8$ सल्फर अणु

Solution

(A) $1$. वृहद्-अणुक कोलाइड वे पदार्थ हैं जिनका आणविक द्रव्यमान बहुत अधिक होता है और जो उपयुक्त विलायक में परिक्षिप्त होने पर कोलाइडल विलयन बनाते हैं।
$2$. इसके उदाहरणों में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले बहुलक जैसे प्रोटीन, स्टार्च और सेलुलोज, तथा कृत्रिम बहुलक जैसे पॉलीथीन और नायलॉन शामिल हैं।
$3$. अपमार्जक और साबुन उच्च सांद्रता पर संगुणित कोलाइड (मिसेल) बनाते हैं।
$4$. $S_8$ सल्फर अणु बहु-अणुक (multimolecular) कोलाइड बनाते हैं।
$5$. अतः, प्रोटीन वृहद्-अणुक कोलाइड का सही उदाहरण है।
278
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कोलाइड्स (colloids) के निम्नलिखित में से किस गुण का उपयोग सोल (sol) कणों के प्रवास की दर को मापने के लिए किया जाता है?
A
टिंडल प्रभाव (Tyndall effect)
B
ब्राउनी गति (Brownian motion)
C
वैद्युत कण संचलन (Electrophoresis)
D
वैद्युत परासरण (Electroosmosis)

Solution

(C) $1$. वैद्युत कण संचलन (Electrophoresis) एक लागू विद्युत क्षेत्र के तहत कोलाइडल कणों की गति की घटना है।
$2$. इस प्रक्रिया में, सोल कण विपरीत आवेशित इलेक्ट्रोड की ओर प्रवास करते हैं।
$3$. एक ज्ञात विद्युत क्षेत्र में इन कणों के वेग को मापकर, प्रवास की दर निर्धारित की जा सकती है।
$4$. इसलिए, सोल कणों के प्रवास की दर को मापने के लिए वैद्युत कण संचलन का उपयोग किया जाता है।
279
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अर्धपारगम्य झिल्ली का उपयोग किए बिना, लगाए गए विद्युत विभव के अंतर्गत कोलाइडल कणों की गति का वर्णन करने के लिए प्रयुक्त शब्द की पहचान करें।
A
अपोहन (Dialysis)
B
वैद्युत कण संचलन (Electrophoresis)
C
वैद्युत परासरण (Electroosmosis)
D
ब्राउनी गति (Brownian motion)

Solution

(B) चरण $1$: दी गई स्थितियों का विश्लेषण करें। लगाए गए विद्युत क्षेत्र के अंतर्गत कोलाइडल कणों की गति को वैद्युत कण संचलन (Electrophoresis) कहा जाता है।
चरण $2$: विकल्पों का मूल्यांकन करें। अपोहन में अर्धपारगम्य झिल्ली के माध्यम से आयनों की गति शामिल होती है। वैद्युत परासरण विद्युत क्षेत्र के अंतर्गत परिक्षेपण माध्यम की गति को संदर्भित करता है। ब्राउनी गति कणों की यादृच्छिक टेढ़ी-मेढ़ी गति है।
चरण $3$: निष्कर्ष निकालें कि विद्युत विभव के अंतर्गत कोलाइडल कणों की गति के लिए सही शब्द वैद्युत कण संचलन है।
280
ChemistryMediumMCQMHT CET · 2026
उत्प्रेरक अभिक्रिया में उत्प्रेरक की क्या भूमिका होती है?
A
यह अभिक्रिया की एन्थैल्पी को कम करता है।
B
यह अभिक्रिया की एन्थैल्पी को बढ़ाता है।
C
यह अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा को कम करता है।
D
यह अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा को बढ़ाता है।

Solution

(C) उत्प्रेरक वह पदार्थ है जो स्वयं किसी स्थायी रासायनिक परिवर्तन से गुजरे बिना रासायनिक अभिक्रिया की दर को बढ़ाता है।
यह कम सक्रियण ऊर्जा $(E_a)$ वाले एक वैकल्पिक अभिक्रिया पथ प्रदान करके कार्य करता है।
सक्रियण ऊर्जा को कम करके, अभिकारक अणुओं का एक बड़ा अंश ऊर्जा अवरोध को पार करने के लिए पर्याप्त ऊर्जा प्राप्त कर लेता है, जिससे अभिक्रिया की दर बढ़ जाती है।
यह अभिक्रिया की एन्थैल्पी $(\Delta H)$ या साम्य स्थिरांक को परिवर्तित नहीं करता है।
281
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भौतिक अधिशोषण (physisorption) की सीमा के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
A
तापमान में वृद्धि के साथ बढ़ता है
B
सतह के क्षेत्रफल में वृद्धि के साथ घटता है
C
वान डर वाल्स बलों की शक्ति में वृद्धि के साथ घटता है
D
तापमान में वृद्धि के साथ घटता है

Solution

(D) चरण $1$: भौतिक अधिशोषण एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रिया है जिसमें अधिशोष्य और अधिशोषक के बीच कमजोर वान डर वाल्स बल कार्य करते हैं।
चरण $2$: ला शातेलिए के सिद्धांत के अनुसार, एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रिया के लिए, तापमान में वृद्धि साम्यावस्था को पीछे की दिशा में स्थानांतरित कर देती है, जिससे अधिशोषण की सीमा कम हो जाती है।
चरण $3$: इसलिए, तापमान बढ़ने पर भौतिक अधिशोषण घट जाता है।
282
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उस गैस की पहचान कीजिए जो अपने संबंधित क्रांतिक ताप $(T_c)$ पर ठोस द्वारा सर्वाधिक मात्रा में अधिशोषित होती है।
A
$N_2(g)$
B
$O_2(g)$
C
$H_2(g)$
D
$SO_2(g)$

Solution

(D) $1$. किसी ठोस सतह पर गैस के अधिशोषण की मात्रा गैस के द्रवीकरण की सुगमता पर निर्भर करती है।
$2$. जो गैसें आसानी से द्रवित हो जाती हैं, उनका क्रांतिक ताप $(T_c)$ अधिक होता है और वे अधिक मात्रा में अधिशोषित होती हैं।
$3$. दी गई गैसों के क्रांतिक ताप इस प्रकार हैं: $H_2 \approx 33 \text{ K}$, $N_2 \approx 126 \text{ K}$, $O_2 \approx 154 \text{ K}$, और $SO_2 \approx 430 \text{ K}$।
$4$. चूंकि $SO_2$ का क्रांतिक ताप सबसे अधिक है, इसलिए यह सबसे आसानी से द्रवित होती है और सर्वाधिक मात्रा में अधिशोषित होती है।
283
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ठोस सतह पर गैस के स्वतः अधिशोषण (spontaneous adsorption) के लिए निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
A
$\Delta S$ ऋणात्मक है और इसलिए $\Delta H$ अत्यधिक धनात्मक होना चाहिए
B
$\Delta S$ ऋणात्मक है और इसलिए $\Delta H$ अत्यधिक ऋणात्मक होना चाहिए।
C
$\Delta S$ धनात्मक है और इसलिए $\Delta H$ ऋणात्मक होना चाहिए।
D
$\Delta S$ धनात्मक है और इसलिए $\Delta H$ भी अत्यधिक धनात्मक होना चाहिए।

Solution

(B) $1$. अधिशोषण एक स्वतः प्रक्रम है, इसलिए गिब्स मुक्त ऊर्जा परिवर्तन $\Delta G$ ऋणात्मक होना चाहिए $(\Delta G < 0)$।
$2$. संबंध $\Delta G = \Delta H - T\Delta S$ द्वारा दिया जाता है।
$3$. अधिशोषण के दौरान, गैस के अणु सतह पर फंस जाते हैं, जिससे यादृच्छिकता (randomness) में कमी आती है, इसलिए $\Delta S$ ऋणात्मक होता है।
$4$. जब $\Delta S$ ऋणात्मक हो, तब $\Delta G$ को ऋणात्मक होने के लिए, $\Delta H$ का मान इतना ऋणात्मक होना चाहिए कि वह $-T\Delta S$ के धनात्मक मान को संतुलित कर सके (क्योंकि $-T\Delta S$ धनात्मक हो जाता है)।
$5$. अतः, प्रक्रम के स्वतः होने के लिए $\Delta H$ का अत्यधिक ऋणात्मक होना आवश्यक है।
284
ChemistryEasyMCQMHT CET · 2026
निम्नलिखित में से कौन सा बल भौतिक अधिशोषण (physisorption) के लिए उत्तरदायी है?
A
कूलम्बिक बल
B
स्थिरवैद्युत बल
C
लंदन परिक्षेपण बल
D
हाइड्रोजन आबंधन

Solution

(C) भौतिक अधिशोषण (physisorption) अधिशोष्य (adsorbate) और अधिशोषक (adsorbent) के बीच आकर्षण के कमजोर वान डर वाल्स बलों के कारण होता है। दिए गए विकल्पों में से, लंदन परिक्षेपण बल (London dispersion forces) वान डर वाल्स बल का एक प्रकार है, जो इसे भौतिक अधिशोषण के लिए उत्तरदायी बनाता है।
285
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स्तंभ-$I$ में दिए गए ज़ेनॉन यौगिकों का स्तंभ-$II$ में उनकी संरचनाओं के साथ मिलान कीजिए।
स्तंभ-$I$स्तंभ-$II$
$(a)$ $XeF_4$$(i)$ पिरामिडीय
$(b)$ $XeF_6$(ii) वर्ग समतलीय
$(c)$ $XeOF_4$(iii) विकृत अष्टफलकीय
$(d)$ $XeO_3$(iv) वर्ग पिरामिडीय
A
$(a)$-(ii), $(b)$-(iii), $(c)$-$(i)$, $(d)$-(iv)
B
$(a)$-(iii), $(b)$-(iv), $(c)$-$(i)$, $(d)$-(ii)
C
$(a)$-$(i)$, $(b)$-(ii), $(c)$-(iii), $(d)$-(iv)
D
$(a)$-(ii), $(b)$-(iii), $(c)$-(iv), $(d)$-$(i)$

Solution

(D) $1$. $XeF_4$: केंद्रीय परमाणु $Xe$ में $2$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pairs) और $4$ आबंध युग्म होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप वर्ग समतलीय ज्यामिति (ii) प्राप्त होती है।
$2$. $XeF_6$: केंद्रीय परमाणु $Xe$ में $1$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म और $6$ आबंध युग्म होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप विकृत अष्टफलकीय ज्यामिति (iii) प्राप्त होती है।
$3$. $XeOF_4$: केंद्रीय परमाणु $Xe$ में $1$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म और $5$ आबंध युग्म होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप वर्ग पिरामिडीय ज्यामिति (iv) प्राप्त होती है।
$4$. $XeO_3$: केंद्रीय परमाणु $Xe$ में $1$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म और $3$ आबंध युग्म होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप पिरामिडीय ज्यामिति $(i)$ प्राप्त होती है।
अतः, सही मिलान $(a)$-(ii), $(b)$-(iii), $(c)$-(iv), $(d)$-$(i)$ है।
286
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निम्नलिखित में से कौन सी उत्कृष्ट गैस उच्च ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करती है?
A
$Ne$
B
$Ar$
C
$Kr$
D
$Xe$

Solution

(D) $1$. उत्कृष्ट गैसें अपने स्थिर इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के कारण सामान्यतः अक्रिय होती हैं।
$2$. उत्कृष्ट गैसों में, $Xe$ (जेनॉन) की परमाणु त्रिज्या बड़ी होने के कारण इसकी आयनन एन्थैल्पी सबसे कम होती है।
$3$. इस कारण से, $Xe$ आसानी से $F$ और $O$ जैसे अत्यधिक विद्युत ऋणात्मक तत्वों के साथ यौगिक बना सकता है, और $+2, +4, +6,$ तथा $+8$ जैसी उच्च ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करता है (उदाहरण के लिए, $XeF_6$ और $XeO_4$ में)।
287
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निम्नलिखित में से कौन सा अंतर-हैलोजन यौगिकों (interhalogen compounds) का गुण नहीं है?
A
सहसंयोजक प्रकृति
B
वाष्पशील लेकिन विस्फोटक नहीं
C
असंतृप्त हाइड्रोकार्बन के साथ योगात्मक उत्पाद बनाना
D
प्रबल अपचायक के रूप में व्यवहार करना

Solution

(D) $1$. अंतर-हैलोजन यौगिक प्रकृति में सहसंयोजक और प्रतिचुंबकीय (diamagnetic) होते हैं।
$2$. ये सामान्यतः $298 \text{ K}$ पर वाष्पशील ठोस या द्रव होते हैं, सिवाय $ClF$ के, जो एक गैस है।
$3$. ये हैलोजन (सिवाय $F_2$) की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील होते हैं क्योंकि $X-X'$ बंध $X-X$ बंध की तुलना में दुर्बल होता है।
$4$. ये असंतृप्त हाइड्रोकार्बन के साथ योगात्मक उत्पाद बना सकते हैं।
$5$. ये प्रबल ऑक्सीकारक (oxidizing agents) के रूप में कार्य करते हैं, न कि अपचायक के रूप में। अतः, विकल्प $D$ अंतर-हैलोजन यौगिकों का गुण नहीं है।

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